पुस्तक समीक्षा

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संघ और प्रचारक जीवन को समझने की दृष्टि देता है ‘तत्वमसि’ उपन्यास – पुस्तक चर्चा

‘तत्वमसि’ उपन्यास के माध्यम से श्रीधर पराड़कर ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और प्रचारक जीवन के त्याग, अनुशासन, राष्ट्रसेवा एवं भारतीय दर्शन को सरल और रोचक शैली में प्रस्तुत किया है।

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कौन सा है पहला छत्तीसगढ़ी उपन्यास, जिसका है यह शताब्दी वर्ष

छत्तीसगढ़ी के प्रथम उपन्यास ‘हीरू के कहिनी’ के शताब्दी वर्ष पर आधारित यह लेख इसके इतिहास, कथानक और साहित्यिक महत्व को विस्तार से प्रस्तुत करता है।

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निराशा के अंधेरे में सूरज की तलाश : पुस्तक-चर्चा

जी. आर. राना के काव्य-संग्रह ‘सूरज कहाँ छिपा है’ पर आधारित यह विस्तृत आलेख प्रकृति, समाज, गाँव-शहर और मानवीय संवेदनाओं की गहन व्याख्या प्रस्तुत करता है।

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हृदय की गहराइयों से निकली आवाज़ “शब्द शाश्वत हैं” रविवारीय पुस्तक -चर्चा 

डॉ. अखिलेश शर्मा के प्रथम काव्य संग्रह ‘शब्द शाश्वत हैं’ की विस्तृत समीक्षा, जिसमें शब्दों की शक्ति, सामाजिक संवेदना, युद्ध की पीड़ा और मानवीय मूल्यों का गहन साहित्यिक विश्लेषण प्रस्तुत है।

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आस्था, इतिहास और शिलालेखों के प्रमाणों से समृद्ध कृति : माणिक्य देवी बस्तर में एक शक्तिपीठ

“माणिक्य देवी : बस्तर में एक शक्तिपीठ” पुस्तक की समीक्षात्मक प्रस्तुति, जिसमें बस्तर के इतिहास, चक्रकोट राज्य, शिलालेखों, मंदिर स्थापत्य, छिंदक नागवंश तथा दंतेश्वरी परंपरा के प्रमाणिक अध्ययन का विश्लेषण किया गया है।

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शिलालेखों और मंदिरों के माध्यम से बारसूर के इतिहास की पुनर्स्मृति : पुस्तक चर्चा

“बस्तर विरासत – बारसूर : चक्रकोट की राजधानी” पुस्तक की समीक्षा, जिसमें बस्तर के प्राचीन इतिहास, मंदिर स्थापत्य, शिलालेखों, छिंदक नागवंश तथा सांस्कृतिक धरोहर का तथ्यात्मक परिचय प्रस्तुत किया गया है।

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