ढाई आखर प्रेम का : लोकमंगल के महाकवि कबीर
संत कबीर की लोकभाषा, निर्गुण भक्ति, सामाजिक चेतना, जाति-विरोध, पाखंड-भंजन, लोकमंगल और कालजयी दोहों का विस्तृत एवं विश्लेषणात्मक अध्ययन।
Read Moreसंत कबीर की लोकभाषा, निर्गुण भक्ति, सामाजिक चेतना, जाति-विरोध, पाखंड-भंजन, लोकमंगल और कालजयी दोहों का विस्तृत एवं विश्लेषणात्मक अध्ययन।
Read Moreडिजिटल नशे की बढ़ती समस्या पर आधारित यह तथ्यात्मक एवं भावनात्मक आलेख बताता है कि कैसे स्मार्टफोन, सोशल मीडिया और ऑनलाइन गेमिंग युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य, पारिवारिक संबंधों और भविष्य को प्रभावित कर रहे हैं। जानिए डिजिटल लत के कारण, दुष्परिणाम और समाधान।
Read Moreक्या हम ऐसे दौर में प्रवेश कर चुके हैं जहाँ रिश्तों की असहमति का समाधान संवाद नहीं, बल्कि अपराध बनता जा रहा है? राजा रघुवंशी और केतन अग्रवाल हत्याकांड के बहाने रिश्तों, नैतिक मूल्यों, पारिवारिक संवाद, मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक संवेदनशीलता पर गंभीर चिंतन।
Read Moreभारत में ओटीटी प्लेटफॉर्मों पर बढ़ते कंटेंट के सांस्कृतिक, वैचारिक और सामाजिक प्रभावों का विश्लेषण। क्या मनोरंजन की आड़ में भारतीय सभ्यता, हिंदू समाज और परिवार संस्था को नकारात्मक रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है?
Read Moreबालोद के तुएगोंडी-पाटेश्वर धाम विवाद के बीच मधुमक्खियों के हमले को लेकर जनजातीय समाज में उभर रही मान्यताओं, देवस्थलों की पवित्रता, प्रकृति-पूजा और पारंपरिक आस्थाओं पर आधारित विश्लेषण। जानिए स्थानीय ग्रामीण इसे किस दृष्टि से देख रहे हैं।
Read Moreबालोद के तुएगोंडी-पाटेश्वर धाम (जामड़ीपाठ) विवाद पर आधारित विश्लेषण, जिसमें स्थानीय ग्रामीणों, पारंपरिक आदिवासी नेतृत्व, गोंड संस्कृति, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक हस्तक्षेप को लेकर उठ रहे सवालों की पड़ताल की गई है।
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