अभनपुर के ग्रेसियस कॉलेज में एबीवीपी द्वारा “परिसर चलो अभियान” एवं “विकसित भारत” विषय पर छात्र संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें युवाओं की राष्ट्र निर्माण में भूमिका पर विस्तृत चर्चा हुई।
राज्यसभा में सात सांसदों के दल-विलय को मंजूरी मिलने के बाद भारतीय राजनीति में बड़ा बदलाव, AAP को झटका और BJP-NDA की ताकत बढ़ी।
जलवायु परिवर्तन के ऐतिहासिक कारण, विकसित देशों की भूमिका, जलवायु न्याय की अवधारणा तथा पर्यावरण संरक्षण के लिए भारत सरकार के प्रयासों पर आधारित विस्तृत गद्यात्मक आलेख।
रायपुर के प्रतिष्ठित न्यूरोफिजिशियन डॉ. संजय शर्मा द्वारा निर्मित शोधपरक वीडियो ने मल्हार की प्राचीन विष्णु प्रतिमा और दक्षिण कौशल की ऐतिहासिक विरासत को नई दृष्टि से सामने लाया है। यह प्रयास छत्तीसगढ़ की उपेक्षित पुरातात्विक धरोहरों को राष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।
छत्तीसगढ़ सरकार ने मैनपाट में अटल विहार योजना हेतु 4.80 हेक्टेयर भूमि आवंटित की। आधुनिक वेलनेस, पर्यटन और आवासीय सुविधाओं से क्षेत्र में रोजगार और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा
वेदों और पुराणों में निहित प्रकृति संरक्षण की अवधारणा आज के पर्यावरण संकट के समाधान का मार्ग दिखाती है। जानिए कैसे भारतीय परंपरा में जैव विविधता, संतुलन और सतत विकास का गहरा संबंध है।
डॉ. नितिन सहारिया के इस विचारोत्तेजक आलेख में भारत की आध्यात्मिक, नैतिक और वैश्विक नेतृत्वकारी भूमिका का विश्लेषण किया गया है, जिसमें नोस्ट्राडेमस की भविष्यवाणियों, भारतीय चिंतन परंपरा और विश्वशांति की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई है।
विश्व मधुमक्खी दिवस पर आधारित यह आलेख मधुमक्खियों के पारिस्थितिक, कृषि, सांस्कृतिक और वैज्ञानिक महत्व को रेखांकित करता है। जानिए कैसे यह नन्हा जीव जैव विविधता, खाद्य सुरक्षा और मानव सभ्यता के अस्तित्व की आधारशिला बना हुआ है।
महादेवी वर्मा की अमर कविता ‘मैं नीर भरी दुख की बदली’ करुणा, विरह, आध्यात्मिक चेतना और मानवीय संवेदना का अद्वितीय स्वर है। जानिए इस काव्य रचना के दार्शनिक, साहित्यिक और भावनात्मक पक्षों का विस्तृत विश्लेषण।
क्या जैव विविधता का ह्रास सीधे मानव स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहा है? वेदों और पुराणों की दृष्टि से जानिए प्रकृति, रोग और जीवन के गहरे संबंध को समझने का वैज्ञानिक आधार।
