इतिहास

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हे राज्य व्हावे ही श्रींची इच्छा : शिवाजी का राज्याभिषेक

6 जून 1674 को रायगढ़ में छत्रपति शिवाजी महाराज का राज्याभिषेक केवल एक राजा का राजतिलक नहीं था, बल्कि हिन्दू राजनीतिक पुनर्जागरण, स्वाभिमान और हिन्दवी स्वराज्य की ऐतिहासिक घोषणा थी। जानिए इस स्वर्णिम घटना के सांस्कृतिक, राजनीतिक और मनोवैज्ञानिक प्रभाव।

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जब एक नारी ने बदली इतिहास की दिशा : अहिल्याबाई होल्कर,

31 मई 1725 को जन्मी लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर ने सुशासन, महिला सशक्तिकरण, आत्मनिर्भरता और भारतीय सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण के माध्यम से राष्ट्र निर्माण का अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत किया। जानिए उनके प्रेरक जीवन और योगदान की विस्तृत कहानी।

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हिन्दवी स्वराज्य केवल शासन नहीं, एक राष्ट्रीय विचार है

छत्रपति शिवाजी महाराज का हिन्दवी स्वराज्य केवल राजनीतिक स्वतंत्रता का विचार नहीं था, बल्कि सांस्कृतिक स्वाभिमान, सुशासन, लोककल्याण और राष्ट्रीय चेतना का प्रेरक दर्शन था।

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इतिहास को स्वर देता डॉ. संजय शर्मा का एक अद्भुत प्रयास : मल्हार के विष्णु

रायपुर के प्रतिष्ठित न्यूरोफिजिशियन डॉ. संजय शर्मा द्वारा निर्मित शोधपरक वीडियो ने मल्हार की प्राचीन विष्णु प्रतिमा और दक्षिण कौशल की ऐतिहासिक विरासत को नई दृष्टि से सामने लाया है। यह प्रयास छत्तीसगढ़ की उपेक्षित पुरातात्विक धरोहरों को राष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।

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सती प्रथा : भारतीय परंपरा का सत्य या भारत की विकृत छवि गढ़ने का प्रचार?

क्या सती प्रथा वास्तव में भारतीय संस्कृति की मूल पहचान थी? ऋग्वेद के “जीवलोक” मंत्र, वैदिक दृष्टि, औपनिवेशिक इतिहास लेखन और भारतीय सभ्यता में स्त्री की भूमिका के संदर्भ में इस विमर्श का संतुलित विश्लेषण।

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विरासत का जीवंत विद्यालय हैं संग्रहालय

अंतर्राष्ट्रीय संग्रहालय दिवस पर आधारित यह आलेख संग्रहालयों की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, शैक्षिक और सामाजिक भूमिका को उजागर करता है। जानिए कैसे संग्रहालय मानव सभ्यता, लोक संस्कृति और विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक जीवंत बनाए रखते हैं।

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