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तिलचट्टों भारत कोई इंस्टाग्राम रील नहीं

“तिलचट्टों भारत कोई इंस्टाग्राम रील नहीं” व्यंग्य में सोशल मीडिया आधारित अराजक राजनीति, डिजिटल क्रांति के भ्रम और भारतीय लोकतंत्र की गहरी जड़ों पर तीखा कटाक्ष प्रस्तुत किया गया है।

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एक प्याली में सिमटी आधी ज़िंदगी : मैं और मेरी चाय

चाय केवल एक पेय नहीं, बल्कि रिश्तों, संवाद, यादों और भारतीय जीवनशैली की आत्मीय संस्कृति का प्रतीक है। अंतर्राष्ट्रीय चाय दिवस पर पढ़िए चाय से जुड़े भावनात्मक, सामाजिक और सांस्कृतिक पक्षों पर आधारित संवेदनशील आलेख।

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आंतरिक जागरण : अप्प दीपो भवः से उपनिषदों तक एक सनातन यात्रा

जापानी संन्यासी और राजकुमार की कथा के माध्यम से बुद्ध, उपनिषद, गीता, शंकराचार्य और विवेकानन्द की दृष्टि से आंतरिक जागरण, साक्षीभाव और आत्मचेतना का गहन विश्लेषण।

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पर्यावरण संरक्षण में भारत की भूमिका : पृथ्वी दिवस

पृथ्वी दिवस के महत्व, पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता और सतत विकास में भारत की भूमिका पर आधारित विस्तृत आलेख। जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण, जैवविविधता और वृक्षारोपण के महत्व को सरल भाषा में समझें।

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रायगढ़ के पॉलिटेक्निक का नाम परिवर्तन कर सेठ किरोड़ीमल की विरासत को मिटाने का प्रयास

रायगढ़ के दानवीर सेठ किरोड़ीमल के योगदान, पॉलिटेक्निक कॉलेज के नाम परिवर्तन विवाद और इससे जुड़ी भावनाओं व ऐतिहासिक महत्व का विस्तृत विश्लेषण।

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मोबाईल और इंटरनेट बिना जग सून : मनकही

मोबाइल और इंटरनेट की बढ़ती लत ने मनुष्य को सामाजिक जीवन से दूर कर डिजिटल निर्भरता में बाँध दिया है। यह लेख आधुनिक जीवन की इसी सच्चाई को मार्मिक रूप में प्रस्तुत करता है।

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