लोक-संस्कृति

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जब कोई गाँव या शहर बन जाता है रंगमंच!

ओड़िशा की प्रसिद्ध लोकनाट्य परंपरा ‘धनुजात्रा’ में पूरा गाँव या शहर रंगमंच बन जाता है। कृष्ण-कथा पर आधारित इस अनूठे महानाटक में कंस की प्रजा-वत्सल छवि, लोक-संस्कृति, जनभागीदारी और भारतीय रंगमंच की अद्भुत परंपरा का विस्तृत परिचय।

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भारतीय चिंतन की त्रिवेणी : एक पेड़ माँ के नाम – विश्व पर्यावरण दिवस विशेष

एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान भारतीय संस्कृति, पर्यावरण संरक्षण और मातृत्व के भाव का अद्भुत संगम है। जानिए कैसे वृक्षारोपण को जनआंदोलन बनाकर यह पहल प्रकृति, संस्कृति और आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारे दायित्व का संदेश देती है।

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प्रकृति संरक्षण की प्राचीन पाठशाला है हमारा कुटुम्ब

भारतीय लोक संस्कृति, परिवार, लोककथाएँ, त्योहार और प्रकृति-पूजा किस प्रकार बच्चों में पर्यावरण संरक्षण के संस्कार विकसित करते हैं, जानिए इस प्रेरक आलेख में।

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जेठ तपै तो सावन बरसे : लोक कथाओं और परंपराओं में नौतपा

नौतपा, जेठ की तपन और सावन की वर्षा के बीच छिपे भारतीय लोक-विज्ञान, कृषि परंपरा, मौसम ज्ञान और जीवन-दर्शन को समझाता विशेष आलेख। जानिए कैसे “जेठ तपै तो सावन बरसे” केवल कहावत नहीं, सदियों का अनुभव है।

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वेदों और पुराणों में प्रकृति संरक्षण की अवधारणा : जैव विविधता दिवस विशेष

वेदों और पुराणों में निहित प्रकृति संरक्षण की अवधारणा आज के पर्यावरण संकट के समाधान का मार्ग दिखाती है। जानिए कैसे भारतीय परंपरा में जैव विविधता, संतुलन और सतत विकास का गहरा संबंध है।

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रमतूला की गूंज में बसती है बुंदेलखंड की सांस्कृतिक आत्मा

रमतूला बुंदेलखंड का पारंपरिक लोक वाद्य है, जो शौर्य, आस्था, विवाह परंपराओं और लोक संस्कृति की पहचान माना जाता है। जानिए इसके इतिहास, संरचना और सांस्कृतिक महत्व की विस्तृत कहानी।

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