ड्रोन तकनीक से अवैध खनन पर सख्ती, छत्तीसगढ़ में निगरानी व्यवस्था हुई मजबूत
छत्तीसगढ़ में अवैध खनन और खनिजों के गैरकानूनी परिवहन पर रोक लगाने के लिए राज्य सरकार ने तकनीक का सहारा लेते हुए एक बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में अब खनन क्षेत्रों में ड्रोन के माध्यम से निगरानी शुरू कर दी गई है, जिससे खनिज संसाधनों की सुरक्षा और राजस्व संरक्षण को नई मजबूती मिल रही है।
सरकार की मंशा स्पष्ट है कि अवैध गतिविधियों को पूरी तरह समाप्त किया जाए। इसी दिशा में आधुनिक तकनीकों को अपनाते हुए खनन क्षेत्रों की रीयल-टाइम मॉनिटरिंग संभव बनाई गई है। इससे अवैध उत्खनन और परिवहन से जुड़े मामलों में तत्काल कार्रवाई करना आसान हो गया है।
पहले जहां मैदानी अमला सीमित संसाधनों के साथ कार्रवाई करता था, वहीं अब ड्रोन तकनीक के जुड़ने से निगरानी का दायरा काफी बढ़ गया है। लगभग 5 किलोमीटर तक की रेंज और 120 मीटर की ऊंचाई से निगरानी करने में सक्षम ड्रोन दुर्गम इलाकों में भी प्रभावी नजर रख पा रहे हैं। इससे संदिग्ध गतिविधियों की तुरंत पहचान कर कार्रवाई की जा रही है।
अधिकारियों के अनुसार, इन ड्रोन में हाई-रिज़ॉल्यूशन कैमरे, नाइट विजन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित विश्लेषण प्रणाली लगी हुई है। यह तकनीक न केवल स्पष्ट तस्वीरें उपलब्ध कराती है, बल्कि गतिविधियों का सटीक विश्लेषण भी करती है, जिससे निगरानी और अधिक प्रभावी हो जाती है।
सरकार की यह पहल अवैध खनन के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति को दर्शाती है। इससे न सिर्फ कानून व्यवस्था मजबूत होगी, बल्कि खनिज संसाधनों के संरक्षण और राजस्व व्यवस्था में पारदर्शिता भी आएगी।
इसी क्रम में 29 अप्रैल 2026 को कांकेर जिले के तहकापार रेत खदान क्षेत्र में ड्रोन की मदद से विशेष अभियान चलाया गया। निगरानी के दौरान अवैध उत्खनन में लगे वाहनों और मशीनों की पहचान की गई। ड्रोन की मौजूदगी का आभास होते ही अवैध गतिविधियों में शामिल लोग अपने वाहन छोड़कर मौके से फरार हो गए।
इसके बाद केंद्रीय उड़नदस्ता दल और जिला प्रशासन ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए महानदी के किनारे भूईगांव क्षेत्र में एक पोकलेन मशीन (जेसीबी 215 एलसी) और एक हाईवा (CG08AV0975) जब्त किया।
कुल मिलाकर, ड्रोन आधारित निगरानी प्रणाली राज्य में अवैध खनन पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने के साथ-साथ सुशासन और तकनीकी नवाचार का मजबूत उदाहरण बनकर उभर रही है।

