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तकनीक से बदलेगी आउटडोर प्रचार व्यवस्था, ‘प्रचार ऐप’ से हर होर्डिंग पर रहेगी नजर

सरकारी योजनाओं और कार्यक्रमों के प्रचार-प्रसार में अब पारदर्शिता और निगरानी को और मजबूत किया जा रहा है। जनसंपर्क विभाग ने आउटडोर मीडिया की मॉनिटरिंग के लिए तकनीक आधारित नया सिस्टम ‘प्रचार ऐप’ लागू किया है, जिससे हर होर्डिंग और प्रचार सामग्री पर रीयल-टाइम नजर रखी जा सकेगी।

दरअसल, आउटडोर मीडिया—जैसे होर्डिंग्स, यूनिपोल्स, एलईडी वैन, डिजिटल वॉल पेंटिंग्स और अन्य ब्रांडिंग माध्यम—सरकारी संदेशों को आम जनता तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाते हैं। खासकर एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और प्रमुख सड़कों जैसे स्थानों पर इनका प्रभाव अधिक होता है।

हालांकि, लंबे समय से यह शिकायतें मिलती रही हैं कि कई एजेंसियां विज्ञापन लगाने में देरी करती हैं या तय समय से पहले उन्हें हटाकर निजी विज्ञापन लगा देती हैं। इसी समस्या के समाधान के लिए यह नई डिजिटल व्यवस्था विकसित की गई है।

तीन चरणों में काम करेगा सिस्टम

‘प्रचार ऐप’ के जरिए पूरी प्रक्रिया को तीन हिस्सों में बांटा गया है—

  • पहले चरण में विभाग प्रचार अभियान की योजना बनाकर एजेंसियों को काम सौंपता है।
  • दूसरे चरण में एजेंसियां कार्यान्वयन की तैयारी कर संसाधनों को फील्ड टीम को देती हैं।
  • तीसरे चरण में माउंटर्स मौके पर जाकर तय स्थानों पर सामग्री लगाते हैं।
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जियो-टैगिंग से होगी सख्त निगरानी

इस ऐप की खासियत यह है कि फील्ड में काम करने वाले माउंटर्स को हर गतिविधि की जियो-टैग्ड और टाइम-स्टैम्प्ड फोटो अपलोड करनी होगी।

  • एक फोटो स्थापना से पहले
  • एक फोटो स्थापना के तुरंत बाद
  • और अभियान के दौरान रोजाना कम से कम एक फोटो

इन तस्वीरों की पहले एजेंसी स्तर पर जांच होगी और फिर विभाग को ऑनलाइन भेजा जाएगा। इससे किसी भी गड़बड़ी पर तुरंत कार्रवाई संभव होगी।

पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर

नई व्यवस्था से हर एक आउटडोर एसेट की अलग-अलग ट्रैकिंग संभव हो गई है। विभाग अब लगभग रीयल-टाइम में सभी अभियानों की स्थिति देख सकेगा, जिससे निगरानी और जवाबदेही दोनों मजबूत होंगी।

एजेंसियों के साथ हुई कार्यशाला

जनसंपर्क आयुक्त रजत बंसल ने 28 अप्रैल को पैनल में शामिल एजेंसियों के साथ कार्यशाला आयोजित कर इस सिस्टम को प्रभावी ढंग से लागू करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि तकनीक के उपयोग से प्रचार कार्यों में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सकेगी।

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चरणबद्ध तरीके से होगा विस्तार

यह सिस्टम 1 अप्रैल 2026 से होर्डिंग्स और यूनिपोल्स पर लागू किया जा चुका है। जल्द ही इसे एलईडी स्क्रीन, ब्रांडिंग और डिजिटल वॉल पेंटिंग्स जैसे अन्य माध्यमों तक भी बढ़ाया जाएगा।

नई प्रिंटिंग पॉलिसी भी जल्द

वहीं, प्रिंटिंग कार्यों में मिल रही शिकायतों को देखते हुए मौजूदा टेंडर प्रक्रिया रद्द कर दी गई है। अब एक नई और पारदर्शी प्रिंटिंग पॉलिसी तैयार की जा रही है। इसके लिए अन्य राज्यों की नीतियों का अध्ययन किया जा रहा है, ताकि बेहतर व्यवस्था लागू की जा सके।