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छत्तीसगढ़ में श्रमिकों के लिए 800 करोड़ DBT सहायता: योजनाओं से मिल रहा सशक्तिकरण को नया आयाम

रायपुर, 30 अप्रैल 2026/ मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा श्रमिकों एवं उनके परिजनों की बेहतरी के लिए अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इन योजनाओं के माध्यम से श्रमिकों की सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने के लिए लगातार आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। श्रम विभाग के तीनों मंडल—छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार मंडल, छत्तीसगढ़ असंगठित कर्मकार राज्य सामाजिक सुरक्षा मंडल एवं छत्तीसगढ़ श्रम कल्याण मंडल—के माध्यम से योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है।

इसी का परिणाम है कि बीते 2 वर्ष 4 माह में श्रमिकों को विभिन्न योजनाओं के तहत लगभग 800 करोड़ रुपये डीबीटी के माध्यम से सीधे उनके खातों में अंतरित किए जा चुके हैं। चालू वर्ष में अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना के अंतर्गत श्रमिकों के 200 बच्चों को प्रदेश के उत्कृष्ट निजी विद्यालयों में प्रवेश दिलाया जाएगा।

मजदूर दिवस विश्वभर में 1 मई को मनाया जाता है। इसका उद्देश्य श्रमिकों के अधिकारों, सामाजिक न्याय और बेहतर कार्य परिस्थितियों के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। वर्ष 1886 में शिकागो के हेमार्केट स्क्वायर में हुए श्रमिक आंदोलन की स्मृति में यह दिवस मनाया जाता है, जहां 8 घंटे कार्य दिवस की मांग को लेकर आंदोलन हुआ था। वर्ष 1889 में द्वितीय अंतर्राष्ट्रीय संगठन ने इसे अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस के रूप में मान्यता दी। भारत में इसकी शुरुआत वर्ष 1923 में चेन्नई (मद्रास) से हुई थी। संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. भीमराव अंबेडकर ने श्रमिकों के कार्य समय को 12 घंटे से घटाकर 8 घंटे किया तथा महिलाओं के लिए प्रसूति अवकाश की व्यवस्था सुनिश्चित की।

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मुख्यमंत्री साय का मानना है कि श्रम विभाग एक अत्यंत महत्वपूर्ण विभाग है, जो व्यापक स्तर पर श्रमिकों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के साथ-साथ औद्योगिक इकाइयों का तकनीकी माध्यमों से औचक निरीक्षण किया जाए, ताकि श्रमिकों के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। इन प्रयासों से राज्य में श्रमिकों के सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण को नई दिशा मिल रही है।

श्रम मंत्री लखनलाल देवांगन ने कहा कि राज्य में सुशासन के चलते अब मजदूर का बच्चा मजदूर नहीं रहेगा। श्रम विभाग द्वारा कई कल्याणकारी योजनाएं संचालित की जा रही हैं, जिनमें मुख्यमंत्री नौनिहाल छात्रवृत्ति योजना, मिनीमाता महतारी जतन योजना, मुख्यमंत्री श्रमिक औजार किट योजना, मुख्यमंत्री नोनी बाबू मेधावी शिक्षा प्रोत्साहन योजना, निर्माण श्रमिकों के बच्चों हेतु निःशुल्क गणवेश एवं पुस्तक-कॉपी सहायता योजना, उत्कृष्ट खेल प्रोत्साहन योजना, मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक आवास सहायता योजना तथा शहीद वीर नारायण सिंह श्रम अन्न योजना प्रमुख हैं।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘हर हाथ को काम’ की सोच के अनुरूप प्रदेश का वाणिज्य, उद्योग एवं श्रम विभाग निरंतर प्रयासरत है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए श्रम विभाग को 256 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है।

श्रम मंत्री देवांगन ने कहा कि सरकार की नीति है कि हर हाथ को काम मिले, उसे उचित पारिश्रमिक प्राप्त हो और हर व्यक्ति को भोजन उपलब्ध हो। इस दिशा में शहीद वीर नारायण सिंह श्रम अन्न योजना के अंतर्गत प्रदेश के विभिन्न जिलों में 38 भोजन केंद्र संचालित किए जा रहे हैं, जहां श्रमिकों को मात्र 5 रुपये में दाल, चावल, सब्जी और आचार सहित गरम भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। इस योजना का विस्तार आगामी समय में सभी जिलों में किया जाएगा।

राज्य सरकार ने श्रमिक आवास सहायता राशि को 1 लाख रुपये से बढ़ाकर 1.50 लाख रुपये कर दिया है। इसी प्रकार ई-रिक्शा अनुदान राशि भी 1 लाख रुपये से बढ़ाकर 1.50 लाख रुपये करने की तैयारी है।

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उल्लेखनीय है कि भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अंतर्गत 5 सितंबर 2008 से अब तक 33 लाख 14 हजार से अधिक श्रमिक पंजीकृत किए जा चुके हैं। मंडल द्वारा 26 योजनाएं संचालित की जा रही हैं तथा 60 श्रमिक वर्ग अधिसूचित हैं। वर्ष 2025-26 में एक प्रतिशत उपकर (सेस) से 315 करोड़ रुपये प्राप्त हुए, जबकि गठन से अब तक कुल 2,808 करोड़ रुपये का संग्रह किया जा चुका है। मार्च 2026 तक 2,558 करोड़ रुपये विभिन्न योजनाओं में व्यय किए जा चुके हैं।

औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा के लिए चालू वित्तीय वर्ष में 10 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। वहीं कर्मचारी राज्य बीमा सेवाओं के तहत श्रमिकों एवं उनके परिवारों को चिकित्सा सुविधाएं प्रदान करने हेतु 76 करोड़ 38 लाख रुपये का बजट निर्धारित किया गया है।

इस प्रकार छत्तीसगढ़ सरकार के समग्र प्रयासों से श्रमिकों के जीवन स्तर में सुधार के साथ-साथ उनके भविष्य को सुरक्षित और सशक्त बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।