साहित्य

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पर्यावरण चेतना से सराबोर रही संकेत साहित्य समिति की सरस काव्य गोष्ठी

रायपुर में संकेत साहित्य समिति द्वारा आयोजित पर्यावरण केन्द्रित सरस काव्य गोष्ठी में प्रदेशभर के साहित्यकारों ने कविता के माध्यम से प्रकृति संरक्षण, जल संकट, वनों की कटाई और प्रदूषण पर गहरी चिंता व्यक्त की।

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छत्तीसगढ़ी साहित्य के नए फूलों और शाखाओं के रचयिता डॉ. बलदेव – एक बातचीत

छत्तीसगढ़ी साहित्य के महत्वपूर्ण समीक्षक डॉ. बलदेव के योगदान, उनकी समीक्षात्मक दृष्टि, तथा ‘छत्तीसगढ़ी कविता के सौ साल’ जैसी कालजयी कृतियों पर जयप्रकाश मानस से शोधार्थी बिमला नायक की विस्तृत बातचीत।

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मैं नीर भरी दुख की बदली

महादेवी वर्मा की अमर कविता ‘मैं नीर भरी दुख की बदली’ करुणा, विरह, आध्यात्मिक चेतना और मानवीय संवेदना का अद्वितीय स्वर है। जानिए इस काव्य रचना के दार्शनिक, साहित्यिक और भावनात्मक पक्षों का विस्तृत विश्लेषण।

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futuredपुस्तक समीक्षा

‘रायपुर’ में है तेजी से बदलते शहर का इतिहास : रविवारीय पुस्तक-चर्चा

वरिष्ठ पत्रकार आशीष सिंह की पुस्तक ‘रायपुर’ राजधानी रायपुर के हजार वर्षों के इतिहास, स्वतंत्रता आंदोलन, सांस्कृतिक विरासत और बदलते शहरी स्वरूप का रोचक दस्तावेज प्रस्तुत करती है।

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साहित्यिक कुंभ में रायगढ़ के साहित्यकार बसंत राघव को मिलेगा सारस्वत सम्मान

बिलासपुर में 17 मई 2026 को डॉ. पालेश्वर प्रसाद शर्मा की स्मृति में भव्य साहित्यिक आयोजन होगा। कार्यक्रम में पुस्तकों का लोकार्पण, साहित्यिक विमर्श और विभिन्न सम्मान प्रदान किए जाएंगे।

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futuredपुस्तक समीक्षा

संघ और प्रचारक जीवन को समझने की दृष्टि देता है ‘तत्वमसि’ उपन्यास – पुस्तक चर्चा

‘तत्वमसि’ उपन्यास के माध्यम से श्रीधर पराड़कर ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और प्रचारक जीवन के त्याग, अनुशासन, राष्ट्रसेवा एवं भारतीय दर्शन को सरल और रोचक शैली में प्रस्तुत किया है।

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