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जीवन मस्ती में जियें

जन्म से मृत्यु के बीच की कालावधि ही जीवन कहलाती है। जीवन क्या है? कैसे इसको कहाँ तक ले जा सकते है ये आप पर निर्भर है। जैसे कर्म रहेगे, वैसे सुख-दुख मिलेगे। संसार हर तरह के बंधनो से बंधा है। बस उस बंधन में भी रहते हुए किस तरह ईश्वर तक पहुच सकते है?

दो रास्ते है, अगर सांसारिक मोह माया में रहना है, तो वह सुख नहीं मिल सकता जो आत्मा को सुकून दे। सांसारिक सुख दो पल का, दुसरा रास्ता भगवान का, जो संसार में रहते हुए भी आपकी आत्मा को सूकून देगा। जीवन भर का आराम, प्रभू से प्रीति करके हर एक के प्रिय बनोगे। संसार से प्रीत करके दुखों के सागर मे डूबते रहोगे पर सुकून नही मिल पायेगा।

जीवन को ऐसे जियो कि वक्त रूक जाए, ये ना बीते। जीवन को लक्ष्य बना कर चलो, उसी लक्ष्य पर चलते रहो। रूकावटें जितनी भी आये, डरो मत, क्योकि मन प्रभू से जूड़ा है। अगर रास्ता प्रभू से जूड़ा है तो कोई भी लक्ष्य बेकार नही हो सकता।
हम लोग क्या है? किसके बनाये हुए है? जीवन मिला किससे है? अपने आप तो बने नही, ईश्वर के हाथ से बने, उसी ने भेजा, उसी के पास अन्त में जाना है। आनंद का हर समय अनुभव करो, आनंद बस एक के ही पास है, वो ईश्वर। उसी मे जितना डूबोगे उतना आनन्द मिलेगा और इच्छाएं भी पूरी होती जायेगी।

मत देखो कहाँ क्या हो रहा है, ये देखो सही मार्ग क्या है जीवन का। आप वो काम करो जिसमे मन प्रसन्न हो, मन को मत भटकाओ कहीं, सगीत और नृत्य भी ऐसी साधन है जो ईश्वर के मार्ग तक ले जाता है। जिसमे मन प्रसन्न हो वो काम करो, दो पल की खुशी नहीं, जीवन भर की खुशी जिसमे मिले वो काम करो।

जीवन को जी भर के जियो, घुट घुट कर नही। संसार को लेकर चलो पर संसार मे मत चलो। हर क्षण आनंद मे चल, आनंद का रास्ता आपको तय करना है। कब तक भटकाते रहोगे जीवन को, कल क्या किसने देखा है इसलिये आनंद में गुजारो हर पल को। जब ईश्वर से जूड़ चूके हो तो कोई क्षण मे चिन्ता नही, जीवन को खुशी-खुशी आनंद के साथ मस्ती में जियो।

प्रीत लगी मोहे ईश्वर से, जानू ना कोई नाता रे ।
मस्त मगन हो जाऊ मैं, जब देखू उसका माथा रे ॥

 

आलेख

श्रीमती ममता पाठक कत्थक, भरतनाट्यम            शिक्षिका
नरसिंहपुर, मध्य प्रदेश

 

 

 

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