साहित्य

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संघ और प्रचारक जीवन को समझने की दृष्टि देता है ‘तत्वमसि’ उपन्यास – पुस्तक चर्चा

‘तत्वमसि’ उपन्यास के माध्यम से श्रीधर पराड़कर ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और प्रचारक जीवन के त्याग, अनुशासन, राष्ट्रसेवा एवं भारतीय दर्शन को सरल और रोचक शैली में प्रस्तुत किया है।

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कौन सा है पहला छत्तीसगढ़ी उपन्यास, जिसका है यह शताब्दी वर्ष

छत्तीसगढ़ी के प्रथम उपन्यास ‘हीरू के कहिनी’ के शताब्दी वर्ष पर आधारित यह लेख इसके इतिहास, कथानक और साहित्यिक महत्व को विस्तार से प्रस्तुत करता है।

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निराशा के अंधेरे में सूरज की तलाश : पुस्तक-चर्चा

जी. आर. राना के काव्य-संग्रह ‘सूरज कहाँ छिपा है’ पर आधारित यह विस्तृत आलेख प्रकृति, समाज, गाँव-शहर और मानवीय संवेदनाओं की गहन व्याख्या प्रस्तुत करता है।

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भारत की आत्मा के कवि: रामधारी सिंह दिनकर

भारत की आत्मा के कवि रामधारी सिंह दिनकर के जीवन, कृतित्व और उनकी ओजपूर्ण कविताओं के माध्यम से राष्ट्रवाद, सामाजिक न्याय और मानवीय संवेदनाओं का गहन विश्लेषण।

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ज्ञान, संस्कार और व्यक्तित्व निर्माण की आधारशिला पुस्तकें

पुस्तकों का महत्व, विश्व पुस्तक दिवस का उद्देश्य, ज्ञान के प्रसार में साहित्य की भूमिका तथा व्यक्तित्व निर्माण में पुस्तकों के योगदान पर आधारित विस्तृत आलेख।

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लोक संस्कृति, शोध और साहित्य के सेतु: डॉ. देवधर महंत

छत्तीसगढ़ी और हिंदी साहित्य के प्रतिष्ठित रचनाकार डॉ. देवधर महंत 23 अप्रैल को 70वां जन्मदिवस मना रहे हैं। ‘अरपा नदिया’ सहित अनेक कालजयी कृतियों से उन्होंने साहित्य को समृद्ध किया।

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