Category archives for: साहित्य

देहात की नारी कमला बाई नारियों के लिए बनी मिसाल

नागपुर से ट्रेन में सवार हुआ, आरक्षण था नहीं, नसीब में रायपुर तक का जनरल बोगी का ही सफ़र लिखा था। दूरी भी अधिक नहीं है, सिर्फ 5 घंटे का सफ़र यूँ ही कट जाता है। भारी भीड़ के बीच मशक्कत के बाद बोगी में घुस सका, चलने की जगह पर भी लोगों का सामान […]

बस्तर पर केन्द्रित दो पुस्तकों का लोकार्पण एवं काव्य-संध्या सम्पन्न

कोंडागाँव। भारत सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय की संस्था राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, भारत यानी नेशनल बुक ट्रस्ट, इंडिया, नयी दिल्ली तथा छत्तीसगढ़ हिन्दी साहित्य परिषद् की कोंडागाँव जिला इकाई के संयुक्त तत्वावधान में गत दिवस बस्तर पर केन्द्रित दो महत्त्वपूर्ण पुस्तकों का लोकार्पण हुआ। इनमें से एक पुस्तक थी, राष्ट्रीय पुस्तक न्यास द्वारा प्रकाशित […]

पगार

पल्लवी ओ पल्लवी, कहाँ हो तुम? कब से मुंह धो कर बैठा हूँ, आधा घंटा हो गया अभी तक नाश्ता नहीं लाई। जल्दी  करो मुझे ऑफ़िस में देर हो रही है।  कल भी टिंकु को स्कूल पहुचाने के कारण देर हो गयी थी। बॉस ने बहुत डांट पिलाई थी। – कमल ने खीजते हुए कहा. […]

6 वां अंतरराष्ट्रीय हिंदी सम्मेलन संयुक्त राज्य अमीरात में

6 वां अंतरराष्ट्रीय हिंदी सम्मेलन संयुक्त राज्य अमीरात में रायपुर । अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हिंदी और हिंदी-संस्कृति को प्रतिष्ठित करने के लिए संस्था व साहित्यिक वेब पत्रिका सृजनगाथा डॉट कॉम (www.srijangatha.com) द्वारा, किये जा रहे प्रयास और पहल के अनुक्रम में रायपुर, बैंकाक, मारीशस, पटाया और ताशकंद (उज्बेकिस्तान) में पांच-पांच अंतरराष्ट्रीय हिंदी सम्मेलनों के सफलतापूर्वक […]

ताशकंद में लहराया हिन्दी का परचम

ताशकंद। सृजन-सम्मान, छत्तीसगढ़ और प्रमोद वर्मा स्मृति संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में (सृजनगाथा डॉट कॉम, निराला शिक्षण समिति, नागपुर और ओनजीसी के सहयोग से) पांचवा अन्तरराष्ट्रीय हिंदी सम्मेलन 24 जून से 1 जूलाई तक सपलतापूर्वक संपन्न हुआ । मुख्य आयोजन उज़्बेकिस्तान की राजधानी ऐतिहासिक शहर ताशकंद के होटल पार्क तूरियान के भव्य सभागार में 26 […]

भूलन कांदा : भई डिस्कवरी मेरी है – विष्णु खरे

रायपुर। संजीव बख्शी के चर्चित उपन्यास भूलनकांदा का विमोचन वृंदावन के स्पेक्ट्रम हॉल में 26 फ़रवरी 2011 को सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रुप में आलोचक विष्णु खरे, डॉ राजेन्द्र मिश्र एवं साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल उपस्थित थे। भूलनकांदा उपन्यास पर डॉ राजेन्द्र मिश्र के आधार वक्तव्य से कार्यक्रम प्रारंभ हुआ। इस अवसर […]

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