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साक्षरता कार्यक्रम का महत्व एवं विकास

साक्षरता शब्द साक्षर से बना है जिसका अर्थ है अक्षर पहचानने, क ,ख, ग और मात्राओं को समझने लिखने-पढ़ने में सक्षम व्यक्ति। जिसे भाषा की मर्यादा तथा सही-गलत का अंतर समझ आता है वही साक्षर है। राष्ट्रीय साक्षरता मिशन के अनुसार भारत में यदि कोई व्यक्ति अपना स्वयं का नाम लिखनेऔर बोलने की योग्यता प्राप्त कर लेता है तो वह एक साक्षर व्यक्ति माना जाता है।

विश्व की निरक्षरता को समाप्त कर, साक्षरता दर को बढ़ाने के उद्देश्य से यूनेस्को ने 7 नवंबर1965 को अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस मनाने का निर्णय लिया। साक्षरता के महत्व और जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से 1966 को पहली बार 8 सितंबर को अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस मनाया गया व तब से यह दिवस वैश्विक स्तर पर मनाया जाता है। वर्ष2023 में 58वां साक्षरता दिवस मनाया जा रहा है।

भारत सहित कई देशों में शिक्षा का देश के प्रत्येक नागरिक को मौलिक अधिकार प्राप्त है। सभी के लिए शिक्षा सुनिश्चित करना, लोगों को सम्मान और मानव अधिकार के रूप में साक्षरता के महत्व को समझाना और वयस्क शिक्षा और साक्षरता दर को बढ़ाने के उद्देश्य से अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस मनाया जाता है।

21वीं सदी में भी लोग शिक्षा से वंचित हैं। यूनेस्को के अनुसार लगभग 77.1करोड़ युवा वयस्क में आज भी साक्षरता कौशल की कमी है और 25 करोड़ बच्चे बुनियादी साक्षरता कौशल प्राप्त करने से वंचित हो रहे हैं। साक्षरता संयुक्त राष्ट्र के सतत लक्ष्यों और विकास के लिए संयुक्त राष्ट्र 2030 एजेंडे में से एक है।

प्रतिवर्ष साक्षरता दिवस की एक थीम निर्धारित की जाती है। 2023 की थीम है “परिवर्तन शील दुनिया के लिए साक्षरता को बढ़ावा देना:टिकाऊ और शांतिपूर्ण समाजों की नींव का निर्माण करना”

अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता का अर्थ केवल पढ़ाना-लिखाना नहीं इसके द्वारा लोगों को उनके अधिकारों एवं कर्तव्यों के प्रति जागरूक कर आत्मनिर्भर बनाना जिससे व्यक्ति सामाजिक विकास का आधार बन सकें। साक्षरता का आधार शिक्षा अर्जन करना होता है। शिक्षा ज्ञान प्रदान करती है। इसप्रकार साक्षरता मानव-अधिकार सशक्तिकरण का मार्ग है। व्यक्ति परिवार, समाज और देश की प्रगति का साधन है।

स्वतंत्रता प्राप्ति से पहले हमारे देश में अनपढ़ लोगों की संख्या अधिक थी। किंतु केंद्र सरकार के अथक प्रयासों से आज समाज ,हर व्यक्ति को शिक्षित करने की लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है। शिक्षा वह साधन है जो व्यक्ति का सर्वांगीण विकास एवं व्यक्तित्व निर्माण करती है। साक्षर एवं शिक्षित होने पर आत्मबल बढ़ता है जिससे व्यक्ति समाज और देश के विकास में अपना महत्वपूर्ण योगदान देता है।

साक्षरता के विकास हेतु राष्ट्रीय स्तर पर राष्ट्रीय साक्षरता मिशन प्राधिकरण (एन.एल.एम.ए.) की व्यवस्था है। यह राष्ट्रीय स्तर की शीर्ष एजेंसी है। इसकी स्थापना 1988 में मत्रिमंडल के अनुमुोदन से मानव संसाधन विकास मत्रांलय (तत्कालीन शिक्षा विभाग) के स्वतत्र औ स्वायत्तशासी खंड के रूप में की गई थी।

‘साक्षर भारत’ के सृजन का स्वप्न साकार करने के लिए केंद्रीय एवं राज्य सरकारों, पचायं त राज संस्थानों, गैर-सरकारी सगठनों (एन.जी.ओ.) और समाज को मिलकर काम करना है। ‘साक्षर भारत’ का निरूपण 2009 में पुरुष और महिला साक्षरता के अतंर को अधिक से अधिक 10 प्रतिशत तक कम करने की परिकल्पना के साथ प्रौढ़ महिला साक्षरता पर फ़ोकस से राष्ट्रीय स्तर पर 2012 तक 80 प्रतिशत साक्षरता स्तर प्राप्‍त करने के उद्देश्य से किया गया था।

शिक्षा अधिकार अधिनियम 2009 को देश में गरीबी व शिक्षा से वंचित बच्चों को निःशुल्क शिक्षा देने के लिए 2010 में लागू किया गया। इस अधिनियम के अंतर्गत 6 से 14 वर्ष के बच्चों को प्राथमिक अनिवार्य स्कूली शिक्षा निःशुल्क प्रदान की जाएगी।

इसके लागू होने के बाद भारत की गिनती भी उन 135 देशों में की जाती है जहां बच्चों के लिए शिक्षा निःशुल्क है। अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस 8सितंबर2009 को माननीय प्रधानमंत्री जी द्वारा भारत सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय के अधीन स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग की ओर से साक्षर भारत मिशन की शुरूआत की गई।

इस कार्यक्रम का लक्ष्य प्रौढ़ शिक्षा विशेष कर महिला शिक्षा को बढ़ावा देना था। साथ ही किसी भी कारण से शिक्षा से वंचित व्यक्ति को आयु सीमा पार कर चुके व्यक्ति को शिक्षा के विविध आयामों में साक्षरता, बुनियादी शिक्षा, औपचारिक शिक्षा के समकक्ष व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास, भौतिक एवं भावनात्मक विकास, व्यवहारिक कलाएं, विज्ञान, खेलकूद एवं मनोरंजक गतिविधियों को शामिल किया गया है।

विश्व साक्षरता दिवस पर विश्व भर में विद्यालयों, महाविद्यालयों, एवं शैक्षिक संस्थानों में साक्षरता पर विभिन्न कार्यक्रमों के द्वारा शिक्षा एवं साक्षरता जागरूकता अभियान चलाया जाता है।गांव-शहरों में गरीब बस्तियों में जाकर उनके बच्चों को एवं निरक्षर लोगों को शिक्षा प्राप्ति के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।

साक्षरता मानव एवं समाज विकास के उद्देश्य से मनाया जाने वाला पर्व है क्योंकि सफलता और जीवन जीने के लिए भोजन की तरह साक्षरता भी महत्वपूर्ण है। देश से गरीबी मिटाने, बाल मृत्यु दर कम करने,जनसंख्या वृद्धि नियंत्रण करने, लैंगिक असमानता दूर करने जैसी अनेक सामाजिक बुराईयों के उन्मूलन के लिए साक्षरता ही एकमात्र शस्त्र है।। साक्षरता का उत्सव सदैव शिक्षा प्राप्त करने को प्रेरित करता है। नवसाक्षरों को उत्साहित करता है जिससे देश की प्रतिष्ठा में वृद्धि होती है।

संदर्भ:-
Raj Help.in what is literacy
www samachar jagat.com/news
International Literacy Day2023
Literacy Day 2023-अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस के इतिहास महत्व और थीम।
International Literacy Day2023-theme, purpose, history, Eduwar

आलेख

श्रीमती रेखा पाण्डेय (लिपि)
व्याख्याता हिन्दी
अम्बिकापुर, छत्तीसगढ़