छत्तीसगढ़ी साहित्य

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छत्तीसगढ़ी साहित्य के नए फूलों और शाखाओं के रचयिता डॉ. बलदेव – एक बातचीत

छत्तीसगढ़ी साहित्य के महत्वपूर्ण समीक्षक डॉ. बलदेव के योगदान, उनकी समीक्षात्मक दृष्टि, तथा ‘छत्तीसगढ़ी कविता के सौ साल’ जैसी कालजयी कृतियों पर जयप्रकाश मानस से शोधार्थी बिमला नायक की विस्तृत बातचीत।

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वरिष्ठ छत्तीसगढ़ी साहित्यकार और पत्रकार सुशील भोले पंचतत्व में विलीन, साहित्य जगत शोकाकुल

छत्तीसगढ़ी भाषा के वरिष्ठ साहित्यकार और पत्रकार सुशील भोले का 26 फरवरी को रायपुर में निधन हो गया। 27 फरवरी को मारवाड़ी श्मशान घाट में अंतिम संस्कार हुआ। साहित्य और पत्रकारिता जगत ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि।

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futuredलोक-संस्कृति

आंचलिक कविताओं का सुन्दर पुष्प -गुच्छ

छत्तीसगढ़ की लोकभाषाओं — हल्बी, भतरी और छत्तीसगढ़ी — में साहित्य साधना करने वाले महर्षि लाला जगदलपुरी का रचना संसार बस्तर अंचल की मिट्टी की महक और जनजीवन की आत्मा से सराबोर है। उनकी कविताओं का नया संकलन “आंचलिक कविताएँ: समग्र” छत्तीसगढ़ की रंग-बिरंगी बोलियों का साहित्यिक उत्सव है। इस संकलन में उनकी कविताओं का हिन्दी अनुवाद भी प्रस्तुत है, जो हल्बी और भतरी भाषाओं की गहराई और संवेदना को व्यापक पाठक वर्ग तक पहुंचाता है। लाला जी की कविताएँ न केवल क्षेत्रीय संस्कृति को उजागर करती हैं, बल्कि बोली से भाषा की ओर बढ़ते साहित्यिक विकास की मिसाल भी पेश करती हैं।

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futuredहमारे नायक

साहित्य जगत के मुकुट पंडित मुकुटधर जी पांडेय

महानदी के तट पर रायगढ़-सारंगढ़ मार्ग के चंद्रपुर से 7 कि.मी. की दूरी पर जांजगीर-चांपा जिलान्तर्गत बालपुर ग्राम स्थित है। यह ग्राम पूर्व चंद्रपुर जमींदारी के अंतर्गत पंडित शालिगराम, पंडित चिंतामणि और पंडित पुरूषोत्तम प्रसाद पांडेय की मालगुजारी में खूब पनपा। पांडेय कुल का घर महानदी के तट पर धार्मिक और साहित्यिक ग्रंथों से युक्त था।

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