आचार्य ललित मुनि

futuredलोक-संस्कृति

दण्डकारण्य और दोरला जनजाति की राम भक्ति परंपरा

दक्षिण बस्तर की दोरला जनजाति में प्रचलित राम पूजा की परंपरा, देवगुड़ी आस्था, पण्डुम पर्व और दण्डकारण्य से जुड़े सांस्कृतिक एवं धार्मिक संबंधों का विस्तृत विवरण।

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futuredराजनीति

छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक के विरोध में ईसाई संगठन क्यों?

छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 के सख्त प्रावधानों का विस्तृत विश्लेषण। अवैध धर्मांतरण पर आजीवन कारावास और 25 लाख जुर्माने का प्रावधान कैसे रोकेगा डेमोग्राफिक बदलाव का षड्यंत्र और क्यों विरोध कर रही हैं ईसाई संस्थाएं।

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futuredधर्म-अध्यात्म

चैती छठ और भारतीय संस्कृति में प्रकृति पूजन की परंपरा

चैती छठ और भारतीय संस्कृति में प्रकृति पूजन की प्राचीन परंपरा। वैदिक मंत्रों से लेकर रामायण-महाभारत तक सूर्य, नदी और पृथ्वी की आराधना। जानिए कैसे चैती छठ प्रकृति पूजन की शुद्धतम वैदिक परंपरा का जीवंत रूप है।

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futuredइतिहास

जब तीन युवाओं ने इतिहास की दिशा बदल दी

23 मार्च 1931 की वह ऐतिहासिक शाम, जब भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु ने हँसते-हँसते फाँसी स्वीकार की। लाहौर षड्यंत्र केस, क्रांतिकारी आंदोलन और शहादत की प्रेरक गाथा पर विस्तृत आलेख।

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futuredधर्म-अध्यात्म

भारतीय संस्कृति में जल स्रोतों का आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व

मानव सभ्यता के इतिहास में यदि किसी एक तत्व को जीवन का पर्याय कहा गया है, तो वह जल है। आज भी जब कोई प्राणी चेतना खोता है तो सबसे पहले उस पर जल का छिड़काव किया जाता है, इसलिए जल को अमृत कहा जाता है।

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futuredलोक-संस्कृति

यदि वन न रहें तो…वन से आत्मसंवाद

“यदि वन न रहें तो…” विषय पर यह भावनात्मक और तथ्यात्मक आलेख जंगल में चलते एक व्यक्ति के आत्मसंवाद के माध्यम से वन संरक्षण, जनसंख्या दबाव और भविष्य की चुनौतियों को प्रस्तुत करता है।

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