सोशल मीडिया कंटेंट और कॉपीराइट : क्या है जानना जरूरी ?

विश्व बौद्धिक संपदा दिवस (World Intellectual Property Day) विशेष आलेख
आज जब हर व्यक्ति एक कंटेंट क्रिएटर है और हर स्मार्टफोन एक प्रसारण माध्यम बन चुका है, तो कॉपीराइट का प्रश्न केवल कानून की किताबों तक सीमित नहीं रहा। यूट्यूब पर किसी गाने की धुन के साथ रील बनाना हो, इंस्टाग्राम पर किसी अखबार की हेडलाइन शेयर करनी हो या किसी के फोटोग्राफ को एडिट करके ट्विटर पर पोस्ट करना हो, इन सभी स्थितियों में कॉपीराइट कानून सक्रिय होता है। यह जानकारी न होना किसी की भी ऑनलाइन उपस्थिति को कानूनी मुसीबत में डाल सकता है।
दुनिया भर में लाखों लोग प्रतिदिन दूसरों का कंटेंट बिना अनुमति के उपयोग करते हैं और उन्हें यह भी नहीं पता होता कि वे कानून तोड़ रहे हैं। भारत में भी ऐसे मामले तेजी से बढ़ रहे हैं जहाँ यूट्यूबर्स, इंस्टाग्राम इन्फ्लुएंसर्स और ब्लॉगर्स पर कॉपीराइट उल्लंघन के आरोप लग रहे हैं। इसलिए यह समझना आवश्यक है कि कॉपीराइट क्या है, यह सोशल मीडिया पर कैसे लागू होता है और भारतीय कानून इस विषय में क्या कहता है।
कॉपीराइट क्या है और यह क्यों महत्वपूर्ण है?
कॉपीराइट एक कानूनी अधिकार है जो किसी मौलिक रचना के निर्माता को उसकी कृति पर नियंत्रण देता है। यह नियंत्रण इस अर्थ में है कि निर्माता यह तय कर सकता है कि उसकी रचना का उपयोग कौन करेगा, किस उद्देश्य से करेगा और किन शर्तों पर करेगा। भारत में कॉपीराइट अधिनियम 1957 इस विषय का मूल कानून है जिसे 1994 और 2012 में संशोधित किया गया।
“कॉपीराइट का अर्थ है साहित्यिक, नाटकीय, संगीत एवं कलात्मक कार्यों के संबंध में धारा 14 में उल्लिखित कार्य करने का विशेष अधिकार।”कॉपीराइट अधिनियम 1957, धारा 13 एवं 14, भारत सरकार
कॉपीराइट संरक्षण स्वतः प्राप्त होता है अर्थात रचना बनाते ही उसके निर्माता को यह अधिकार मिल जाता है। पंजीकरण कराना अनिवार्य नहीं है, हालाँकि यह साक्ष्य के रूप में उपयोगी होता है। भारत में कॉपीराइट की अवधि सामान्यतः लेखक की मृत्यु के बाद 60 वर्षों तक चलती है।
सोशल मीडिया के संदर्भ में यह समझना जरूरी है कि कॉपीराइट किन चीजों पर लागू होता है। फोटोग्राफ, वीडियो, संगीत, लिखित सामग्री, चित्र, सॉफ्टवेयर, फिल्मी दृश्य, पत्रकारिता की रिपोर्ट और यहाँ तक कि सोशल मीडिया पर लिखी गई मौलिक पोस्ट भी कॉपीराइट से सुरक्षित हो सकती हैं। केवल विचार, सूचनाएँ, समाचार तथ्य और ऐसी सामग्री जिसका कॉपीराइट काल समाप्त हो गया हो, सुरक्षा से बाहर होती है।
सोशल मीडिया पर कॉपीराइट उल्लंघन के सामान्य तरीके
सोशल मीडिया पर सबसे आम उल्लंघन वह है जब कोई व्यक्ति किसी गाने को बिना लाइसेंस के अपने वीडियो में उपयोग करता है। यूट्यूब का Content ID सिस्टम इसे तुरंत पकड़ लेता है और वीडियो या तो हटा दिया जाता है या उसकी कमाई संगीत कंपनी को चली जाती है। भारत में टी सीरीज, सोनी म्यूजिक और जी म्यूजिक जैसी कंपनियाँ इस सिस्टम का सक्रिय उपयोग करती हैं।
दूसरा सामान्य उल्लंघन है किसी फोटोग्राफर की तस्वीर को बिना श्रेय दिए या बिना अनुमति के उपयोग करना। इंस्टाग्राम पर अक्सर यह होता है कि कोई एक सुंदर तस्वीर देखता है, उसे डाउनलोड करता है और अपनी प्रोफाइल पर पोस्ट कर देता है। यह स्पष्ट कॉपीराइट उल्लंघन है, भले ही उस व्यक्ति ने फोटोग्राफर का नाम लिख दिया हो।
महत्वपूर्ण तथ्य: श्रेय देना पर्याप्त नहीं है।
यह एक बहुत प्रचलित भ्रांति है कि यदि आप किसी की रचना का उपयोग करते समय उनका नाम लिख देते हैं तो आप कॉपीराइट उल्लंघन से बच जाते हैं। कानूनी दृष्टि से यह सत्य नहीं है। श्रेय देना नैतिक दृष्टि से सही है, किंतु यह अनुमति का विकल्प नहीं है। अनुमति लेना और श्रेय देना, दोनों अलग चीजें हैं।
तीसरा उल्लंघन है किसी समाचार संस्थान या पत्रिका के लेख को पूरी तरह कॉपी करके फेसबुक या व्हाट्सएप पर शेयर करना। कई लोग सोचते हैं कि समाचार सार्वजनिक संपत्ति है, लेकिन समाचार के तथ्य भले ही सार्वजनिक हों, उस तथ्य को जिस तरह से लिखा और प्रस्तुत किया गया है वह कॉपीराइट से सुरक्षित होता है।
चौथा और तेजी से बढ़ता उल्लंघन है रीमिक्स और मीम कल्चर। किसी फिल्म के दृश्य को काटकर उस पर कोई अन्य संगीत डालना, किसी प्रसिद्ध तस्वीर पर संपादन करके नया अर्थ देना, या किसी के भाषण के अंश को अपने वीडियो में डालना, ये सभी स्थितियाँ कॉपीराइट के दायरे में आ सकती हैं।
भारतीय कानून क्या कहता है: उचित उपयोग का सिद्धांत
कॉपीराइट कानून में एक महत्वपूर्ण अवधारणा है जिसे उचित उपयोग या फेयर डीलिंग कहते हैं। भारतीय कॉपीराइट अधिनियम 1957 की धारा 52 में उन परिस्थितियों का उल्लेख है जिनमें कॉपीराइट सामग्री का उपयोग अनुमति के बिना भी किया जा सकता है।
“किसी साहित्यिक, नाटकीय, संगीत या कलात्मक कार्य का निम्नलिखित कार्यों हेतु उचित व्यवहार कॉपीराइट उल्लंघन नहीं होगा: शोध, व्यक्तिगत उपयोग, आलोचना या समीक्षा, वर्तमान घटनाओं की रिपोर्टिंग।”कॉपीराइट अधिनियम 1957, धारा 52(1)(a), भारत सरकार
इसका अर्थ यह है कि यदि आप किसी पुस्तक की समीक्षा करते हुए उसके कुछ अंश उद्धृत करते हैं, किसी फिल्म की आलोचना करते हुए उसके दृश्य दिखाते हैं, या शैक्षणिक उद्देश्य से किसी रचना का उपयोग करते हैं, तो यह उचित उपयोग की श्रेणी में आ सकता है। लेकिन इसकी सीमाएँ हैं और ये सीमाएँ अदालतें तय करती हैं।
अमेरिकी कानून में इसे Fair Use कहते हैं और वहाँ चार कसौटियाँ हैं: उपयोग का उद्देश्य और प्रकृति, कॉपीराइट कार्य की प्रकृति, उपयोग की गई मात्रा, और मूल बाजार पर प्रभाव। भारत में उचित व्यवहार की परिभाषा अमेरिकी Fair Use से थोड़ी संकीर्ण है और इसे न्यायालय संदर्भ के अनुसार तय करते हैं।
प्लेटफॉर्म की नीतियाँ और उनका व्यावहारिक प्रभाव
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के अपने कॉपीराइट नियम होते हैं जो राष्ट्रीय कानून से अलग और कभी कभी अधिक सख्त होते हैं। यूट्यूब का Content ID सिस्टम दुनिया का सबसे बड़ा स्वचालित कॉपीराइट प्रबंधन तंत्र है। इसमें संगीत और वीडियो कंपनियाँ अपनी सामग्री पंजीकृत कराती हैं और यूट्यूब स्वचालित रूप से हर अपलोड होने वाले वीडियो में उस सामग्री की पहचान करता है।
यदि आपके यूट्यूब वीडियो में कॉपीराइट सामग्री मिलती है तो तीन परिणाम हो सकते हैं। पहला, वीडियो पर दावा किया जाता है और उसकी कमाई कॉपीराइट धारक को जाती है। दूसरा, वीडियो कुछ देशों में या पूरी दुनिया में ब्लॉक कर दिया जाता है। तीसरा, वीडियो को हटा दिया जाता है और चैनल को स्ट्राइक मिलती है। तीन स्ट्राइक के बाद चैनल हमेशा के लिए बंद हो सकता है।
इंस्टाग्राम और फेसबुक पर Rights Manager नाम का टूल इसी प्रकार काम करता है। मेटा प्लेटफॉर्म्स पर यदि कोई वीडियो कॉपीराइट सामग्री के साथ अपलोड हो तो उसे स्वचालित रूप से हटाया जा सकता है या म्यूट किया जा सकता है।
जब कोई उपयोगकर्ता यह समझता है कि उसके कंटेंट को गलत तरीके से हटाया गया है, तो वह काउंटर नोटिस दाखिल कर सकता है। यह DMCA यानी Digital Millennium Copyright Act की प्रक्रिया है जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लागू है।
भारतीय न्यायिक मामले और उनकी सीख
दिल्ली उच्च न्यायालय बॉम्बे उच्च न्यायालय
भारत में कॉपीराइट से संबंधित कई महत्वपूर्ण न्यायिक निर्णय आए हैं जो सोशल मीडिया कंटेंट के संदर्भ में प्रासंगिक हैं। दिल्ली उच्च न्यायालय ने Super Cassettes Industries Ltd. बनाम YouTube LLC मामले में यह स्थापित किया कि इंटरनेट प्लेटफॉर्म्स की जिम्मेदारी केवल नोटिस मिलने के बाद सामग्री हटाने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें सक्रिय रूप से उल्लंघन रोकने के कदम उठाने चाहिए।
“Mere knowledge of infringement coupled with failure to act would make the intermediary liable for the same.”Super Cassettes Industries Ltd. v. YouTube LLC, Delhi High Court, 2012
एक अन्य महत्वपूर्ण मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय ने India TV Independent News Services Pvt. Ltd. बनाम Yashraj Films Pvt. Ltd. में यह निर्धारित किया कि समाचार चैनल द्वारा किसी फिल्मी गाने का संक्षिप्त उपयोग फेयर डीलिंग की श्रेणी में आ सकता है यदि वह वर्तमान घटनाओं की रिपोर्टिंग के संदर्भ में हो।
इन निर्णयों से यह स्पष्ट है कि भारतीय न्यायालय डिजिटल माध्यमों पर कॉपीराइट उल्लंघन के मामलों में सतर्क और सक्रिय हैं। सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और डिजिटल पत्रकारों के लिए यह जानकारी विशेष रूप से आवश्यक है।
क्रिएटिव कॉमन्स लाइसेंस: एक व्यावहारिक समाधान
क्रिएटिव कॉमन्स एक ऐसी प्रणाली है जो कॉपीराइट धारकों को यह तय करने की अनुमति देती है कि वे अपनी रचना का उपयोग किन शर्तों पर और कहाँ तक करने देना चाहते हैं। इसके छह मुख्य लाइसेंस हैं जो विभिन्न स्तरों की अनुमति देते हैं।
CC BY लाइसेंस का अर्थ है कि आप उस रचना का उपयोग कर सकते हैं यदि आप मूल निर्माता का श्रेय देते हैं। CC BY SA में आप उपयोग कर सकते हैं लेकिन आपकी नई रचना भी उसी लाइसेंस के तहत रखनी होगी। CC BY NC में केवल गैर व्यावसायिक उपयोग की अनुमति है। CC BY ND में आप रचना को बदल नहीं सकते। विकिपीडिया, फ्लिकर और कई सरकारी वेबसाइटें क्रिएटिव कॉमन्स लाइसेंस के तहत सामग्री उपलब्ध कराती हैं।
सोशल मीडिया क्रिएटर्स के लिए यह सलाह दी जाती है कि वे अपने कंटेंट के लिए यूट्यूब ऑडियो लाइब्रेरी, Pixabay, Unsplash, Pexels जैसे प्लेटफॉर्म्स का उपयोग करें जहाँ रॉयल्टी फ्री या क्रिएटिव कॉमन्स सामग्री मिलती है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और कॉपीराइट का नया संकट
2023 और 2024 में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उदय ने कॉपीराइट के प्रश्न को एक नई जटिलता दे दी है। जब कोई AI टूल किसी कलाकार की शैली में चित्र बनाता है या किसी लेखक के जैसा लिखता है, तो क्या यह कॉपीराइट उल्लंघन है? यह प्रश्न अभी कानूनी रूप से अनिर्णीत है।
अमेरिका में कई मामले चल रहे हैं जिनमें कलाकारों ने AI कंपनियों पर आरोप लगाया है कि उन्होंने बिना अनुमति के उनकी कृतियों से AI को प्रशिक्षित किया। Getty Images ने Stability AI पर मुकदमा दायर किया है। भारत में भी इस विषय पर कानूनी स्पष्टता का अभाव है।
सोशल मीडिया पर AI से बनाए गए कंटेंट को शेयर करते समय यह ध्यान रखना जरूरी है कि उस AI ने अपने प्रशिक्षण में किस सामग्री का उपयोग किया और आउटपुट कहीं से कॉपी तो नहीं लगती। यह नया और विकसित हो रहा क्षेत्र है जिस पर आने वाले वर्षों में महत्वपूर्ण कानूनी निर्णय आएंगे।
सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 और मध्यवर्ती दायित्व
भारत में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 और उसके 2021 में संशोधित नियम सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर विशेष जिम्मेदारियाँ डालते हैं। सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम 2021 के अनुसार बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को कॉपीराइट उल्लंघन की शिकायत मिलने पर निर्धारित समय सीमा में कार्यवाही करनी होती है।
