संसद के विशेष सत्र में तीन बड़े विधेयक पेश, महिला आरक्षण और परिसीमन पर गरमाई राजनीति
संसद के बजट सत्र की विशेष बैठक में गुरुवार को केंद्र सरकार ने तीन अहम विधेयक पेश किए, जिनमें महिला आरक्षण लागू करने और लोकसभा-विधानसभा सीटों के परिसीमन से जुड़े प्रस्ताव प्रमुख हैं। इन विधेयकों को लेकर संसद के भीतर और बाहर राजनीतिक बहस तेज हो गई है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सत्र शुरू होने से पहले कहा कि देश महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाने जा रहा है। माना जा रहा है कि वे सदन में महिला आरक्षण विधेयक पर विस्तार से अपनी बात रखेंगे।
संसद में पेश हुए तीन प्रमुख विधेयक
विशेष सत्र के दौरान केंद्र सरकार की ओर से निम्न विधेयक सदन में प्रस्तुत किए गए—
- संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026
- परिसीमन विधेयक, 2026
- केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026
इनमें पहले दो विधेयक केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने पेश किए, जबकि तीसरा विधेयक केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सदन में रखा।
महिला आरक्षण लागू करने पर फोकस
सरकार का मुख्य उद्देश्य लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने वाले कानून को लागू करना है। यह कानून वर्ष 2023 में पारित हो चुका है, लेकिन इसकी प्रभावी शुरुआत नई जनगणना और परिसीमन प्रक्रिया से जुड़ी हुई है।
परिसीमन पर विपक्ष का विरोध
परिसीमन विधेयक को लेकर विपक्षी दलों ने आपत्ति जताई है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने प्रस्तावित विधेयक की प्रति जलाकर राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन की शुरुआत की। उन्होंने काला झंडा दिखाकर केंद्र सरकार के खिलाफ विरोध दर्ज कराया।
कांग्रेस ने उठाए सवाल
कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने सरकार पर संविधान को कमजोर करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि संविधान के अनुसार परिसीमन नवीनतम जनगणना के आधार पर होना चाहिए। उनका आरोप है कि यह प्रस्ताव महिलाओं, जातीय जनगणना और संघीय ढांचे—तीनों के खिलाफ है।
सियासी तापमान बढ़ा
महिला आरक्षण जैसे संवेदनशील मुद्दे पर जहां सरकार इसे ऐतिहासिक पहल बता रही है, वहीं विपक्ष परिसीमन और प्रतिनिधित्व के सवाल पर सरकार को घेर रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में संसद में तीखी बहस देखने को मिल सकती है।

