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पश्चिम एशिया युद्ध पर PM मोदी की चेतावनी: ऊर्जा आपूर्ति और महंगाई पर पड़ सकता है लंबा असर

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राज्यसभा में संबोधन के दौरान पश्चिम एशिया में जारी अमेरिका-ईरान संघर्ष को लेकर देशवासियों को सतर्क रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि इस युद्ध का असर ऊर्जा आपूर्ति, वैश्विक सप्लाई चेन और महंगाई पर लंबे समय तक देखने को मिल सकता है।

प्रधानमंत्री ने भरोसा दिलाया कि केंद्र सरकार हर मोर्चे पर स्थिति की निगरानी कर रही है और राष्ट्रीय हितों की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में चुनौतियां बढ़ सकती हैं, इसलिए सभी नागरिकों और राज्यों को मिलकर इनका सामना करना होगा।

उन्होंने राज्यों से अपील की कि वे कोरोना काल की तरह समन्वय बनाकर काम करें। पीएम मोदी ने विशेष रूप से मजदूरों और कमजोर वर्गों का जिक्र करते हुए कहा कि संकट के समय सबसे ज्यादा असर इन्हीं पर पड़ता है, इसलिए इनके संरक्षण के लिए राज्य सरकारों को सक्रिय रहना चाहिए। साथ ही उन्होंने कालाबाजारी पर कड़ी नजर रखने और ऐसी गतिविधियों को रोकने के निर्देश भी दिए।

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प्रधानमंत्री ने बताया कि सरकार ने स्थिति से निपटने के लिए सात सशक्त समूह गठित किए हैं, जो ईंधन, आपूर्ति श्रृंखला, उर्वरक और महंगाई नियंत्रण जैसे अहम क्षेत्रों में रणनीति तैयार कर रहे हैं।

विदेशों में फंसे भारतीयों की सुरक्षा को लेकर भी सरकार सक्रिय है। पीएम मोदी ने बताया कि अब तक 3.75 लाख से अधिक भारतीयों को सुरक्षित वापस लाया जा चुका है। इनमें ईरान से लौटे 1,000 से ज्यादा नागरिक शामिल हैं, जिनमें बड़ी संख्या में मेडिकल के छात्र भी हैं। उन्होंने कहा कि भारत लगातार कूटनीतिक प्रयासों के जरिए सभी पक्षों को शांतिपूर्ण समाधान की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रहा है।

प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि युद्ध के कारण Strait of Hormuz से गुजरने वाले जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है, लेकिन इसके बावजूद भारत ने ऊर्जा आपूर्ति बनाए रखने के लिए वैकल्पिक उपाय किए हैं।

ऊर्जा सुरक्षा को लेकर उन्होंने कहा कि देश के पास पर्याप्त कच्चे तेल का भंडार है। रणनीतिक पेट्रोलियम भंडारण क्षमता को बढ़ाकर 53 लाख मीट्रिक टन से अधिक किया गया है और इसे 65 लाख मीट्रिक टन तक बढ़ाने की योजना है। इसके अलावा, भारत ने पिछले दशक में अपने ऊर्जा आयात स्रोतों को 27 से बढ़ाकर 41 देशों तक विस्तारित किया है, जिससे किसी एक देश पर निर्भरता कम हुई है।

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प्रधानमंत्री ने कहा कि बीते वर्षों में किए गए सुधार और तैयारियां ही इस तरह के वैश्विक संकटों से निपटने में देश की मजबूती साबित हो रही हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत संवाद और कूटनीति के माध्यम से ही इस संकट का समाधान चाहता है और मानवता के हित में शांति ही सर्वोपरि है।