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सड़क पर सुरक्षित सफर भी मौलिक अधिकार, सुप्रीम कोर्ट ने हाईवे सुरक्षा पर दिए देशभर में सख्त निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि सड़कों पर सुरक्षित आवाजाही का अधिकार, संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का अभिन्न हिस्सा है। अदालत ने राष्ट्रीय राजमार्गों पर बढ़ते हादसों और रोकी जा सकने वाली मौतों पर चिंता जताते हुए देशभर में हाईवे सुरक्षा मजबूत करने के लिए कई अहम निर्देश जारी किए हैं।

न्यायमूर्ति जे.के. माहेश्वरी और न्यायमूर्ति ए.एस. चांदुरकर की पीठ ने कहा कि जीवन का अधिकार केवल अवैध रूप से जीवन छीनने से सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राज्य की जिम्मेदारी भी तय करता है कि नागरिकों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराया जाए।

अदालत ने स्पष्ट कहा कि प्रशासनिक कठिनाइयों या आर्थिक संसाधनों की कमी को लोगों की सुरक्षा में लापरवाही का आधार नहीं बनाया जा सकता। मानव जीवन की गरिमा और सुरक्षा सर्वोपरि है।

सुप्रीम कोर्ट के प्रमुख निर्देश

हाईवे पर पार्किंग पर रोक

भारी और व्यावसायिक वाहन राष्ट्रीय राजमार्ग की मुख्य सड़क या किनारे खड़े नहीं किए जा सकेंगे। केवल निर्धारित पार्किंग जोन या ले-बाय क्षेत्रों में ही वाहन खड़े करने की अनुमति होगी।

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अतिक्रमण हटाने के आदेश

हाईवे क्षेत्र में बने अवैध ढाबे, दुकानें और अन्य व्यावसायिक ढांचे 60 दिनों के भीतर हटाने के निर्देश दिए गए हैं।

लाइसेंस से पहले अनुमति जरूरी

हाईवे सुरक्षा क्षेत्र में किसी भी व्यापार या निर्माण के लिए संबंधित हाईवे प्राधिकरण से पहले अनुमति लेना अनिवार्य होगा।

जिला स्तरीय टास्क फोर्स

जहां-जहां राष्ट्रीय राजमार्ग गुजरते हैं, वहां हर जिले में जिला मजिस्ट्रेट की निगरानी में हाईवे सुरक्षा टास्क फोर्स बनाई जाएगी।

लगातार पेट्रोलिंग व्यवस्था

राज्य पुलिस और परिवहन विभाग को हाईवे पर विशेष निगरानी टीम तैनात कर लगातार गश्त करने के निर्देश दिए गए हैं।

ब्लैक स्पॉट की पहचान

45 दिनों के भीतर दुर्घटना संभावित स्थानों की पहचान कर सूची सार्वजनिक करनी होगी। इन स्थानों पर लाइट, संकेतक बोर्ड और स्पीड कंट्रोल सिस्टम लगाए जाएंगे।

इमरजेंसी सुविधा बढ़ाने के आदेश

हर 75 किलोमीटर के भीतर एम्बुलेंस और रिकवरी क्रेन की उपलब्धता सुनिश्चित करनी होगी।

ट्रक चालकों के लिए सुविधाएं

राष्ट्रीय राजमार्गों पर नियमित अंतराल में ट्रक पार्किंग, विश्राम स्थल और सुरक्षित ले-बाय विकसित किए जाएंगे।

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यात्रियों के लिए जरूरी सुविधाएं

हाईवे पर विश्राम स्थल, शौचालय, भोजन व्यवस्था और प्राथमिक उपचार केंद्र जैसी सुविधाएं अनिवार्य रूप से विकसित करने के निर्देश दिए गए हैं।

तकनीक से निगरानी

सीसीटीवी कैमरे, स्पीड डिटेक्टर और इमरजेंसी कॉल बॉक्स जैसी आधुनिक निगरानी व्यवस्था लागू की जाएगी।

शिकायत प्रणाली शुरू होगी

हाईवे पर अतिक्रमण या अन्य समस्याओं की शिकायत के लिए टोल-फ्री हेल्पलाइन और डिजिटल शिकायत पोर्टल शुरू किए जाएंगे।

राज्यों के बीच समन्वय

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय को सभी राज्यों के बीच समन्वय तंत्र विकसित करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि नियमों का समान रूप से पालन हो सके।

75 दिनों में रिपोर्ट मांगी

सुप्रीम कोर्ट ने सभी संबंधित एजेंसियों से 75 दिनों के भीतर अनुपालन रिपोर्ट जमा करने को कहा है।

इस फैसले को सड़क सुरक्षा की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है, जिससे आने वाले समय में हाईवे हादसों में कमी लाने में मदद मिल सकती है।

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