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बस्तर में बड़ी हलचल: कुख्यात नक्सली पापा राव के सरेंडर की तैयारी, 17 साथियों के साथ कर सकता है आत्मसमर्पण

छत्तीसगढ़ में नक्सल उन्मूलन की तय समयसीमा से ठीक पहले एक बड़ी खबर सामने आ रही है। बस्तर क्षेत्र का कुख्यात नक्सली कमांडर पापा राव उर्फ मंगू आज आत्मसमर्पण कर सकता है। सूत्रों के मुताबिक, वह अपने 17 साथियों के साथ सरेंडर की प्रक्रिया में शामिल हो सकता है।

बताया जा रहा है कि सुकमा जिले का रहने वाला करीब 56 वर्षीय पापा राव लंबे समय से नक्सली गतिविधियों में सक्रिय रहा है और आधुनिक हथियारों से लैस रहता है। वह पश्चिम बस्तर डिवीजन का सचिव होने के साथ-साथ दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (DKSZC) का सदस्य भी है।

इस घटनाक्रम पर राज्य के गृहमंत्री विजय शर्मा ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि पापा राव के आत्मसमर्पण के साथ प्रदेश में नक्सलवाद की कमर टूट जाएगी और अब बड़े कैडर का कोई सक्रिय नक्सली शेष नहीं रहेगा। राज्य सरकार ने उस पर 25 लाख रुपये का इनाम घोषित कर रखा है।

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जानकारी के अनुसार, पापा राव अपने साथियों के साथ जंगल के रास्ते निकल चुका है और बीजापुर क्षेत्र में पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। वहां से उसे जगदलपुर लाया जा सकता है, जहां बस्तर संभाग के आईजी पी. सुंदरराज के समक्ष वह औपचारिक रूप से आत्मसमर्पण करेगा।

सुरक्षा एजेंसियों ने भी इस प्रक्रिया को लेकर सतर्कता बढ़ा दी है। पुलिस की एक टीम इंद्रावती नेशनल पार्क क्षेत्र के एक गोपनीय स्थान के लिए रवाना हो चुकी है, जहां से पापा राव को सुरक्षित लाने की तैयारी है।

पापा राव को नक्सली संगठन का एक प्रमुख रणनीतिकार माना जाता है। वह कई बड़े हमलों की साजिश में शामिल रहा है, जिनमें कुटरू-बेदरे मार्ग पर हुआ आईईडी ब्लास्ट भी शामिल है, जिसमें आठ जवान शहीद हुए थे। सुरक्षा बलों पर एंबुश लगाने और हमले की रणनीति तैयार करने में भी उसकी अहम भूमिका रही है।

बताया जाता है कि उसकी पत्नी उर्मिला भी पीएलजीए बटालियन की सदस्य थी, जो एक मुठभेड़ में मारी गई थी।

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कौन है पापा राव?
पापा राव उर्फ मंगू पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (PLGA) का सक्रिय सदस्य रहा है और माओवादी संगठन में रणनीतिक स्तर पर उसकी मजबूत पकड़ मानी जाती है। पश्चिम बस्तर डिवीजन का सचिव होने के साथ वह दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी का भी हिस्सा रहा है। बस्तर में कई बड़े नक्सली हमलों के पीछे उसकी भूमिका बताई जाती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि उसका आत्मसमर्पण होता है, तो बस्तर क्षेत्र में नक्सल गतिविधियों पर बड़ा असर पड़ सकता है और शांति स्थापना की दिशा में यह एक अहम कदम साबित होगा।