प्रधानमंत्री के रूप में श्रीनरेंद्र मोदी के बारह वर्ष : बिना अवकाश लिये निरंतर कार्य करने का कीर्तिमान
प्रधानमंत्री के रूप में श्रीनरेंद्र मोदी अपने कार्यकाल के बारह वर्ष पूरे करने जा रहे हैं। उनका यह कार्यकाल कार्यशैली, नीति निर्णयों की विशिष्टता से ही नहीं कीर्तिमानों और नवाचारों से भरा है। ऐसे नवाचार जिनकी चर्चा वैश्विक स्तर पर हुई। बिना कोई अवकाश लिये निरन्तर सोलह से अठारह घंटे काम करने वाले संसार के अकेले राजनेता हैं उनकी यह विशेषता उन्हें एक विशिष्ट प्रज्ञा पुरुष की पंक्ति में प्रतिष्ठित करती है।
श्रीनरेंद्र मोदी इससे पहले गुजरात प्राँत के मुख्यमंत्री रहे। सत्ता प्रमुख रहते हुये इन दोनों कार्य दायित्व की कुल अवधि चौबीस वर्ष से अधिक हो रही है। उन्होंने इतनी लंबी अवधि तक सत्ता का नेतृत्व करने का भी कीर्तिमान बनाया है। उनके नाम यह कीर्तिमान 22 मार्च 2026 को अंकित हो गया। तब उन्होंने सत्ता प्रमुख के रूप में 8931 दिन पूरे किये थे। उनसे पहले सबसे अधिक सत्ता प्रमुख रहने का कीर्तिमान सिक्किम के पूर्व मुख्यमंत्री श्रीपवन कुमार चिमलिंग के नाम था। वे 8930 दिनों तक लगातार सत्ता प्रमुख रहे थे। जिसे मोदीजी ने पीछे छोड़ दिया है। और वे निरन्तर आगे बढ़ रहे हैं।
भारत में सबसे अधिक दिन सत्ता का नेतृत्व करने के इस कीर्तिमान के साथ श्रीनरेंद्र मोदी ने एक ऐसा कीर्तिमान स्थापित किया है जिसकी चर्चा पूरे विश्व में हो रही है। वे संसार के एकमात्र ऐसे राजनेता हैं जिन्होंने अपने पद दायित्व की इतनी लंबी अवधि में कोई अवकाश नहीं लिया। न उन्होंने गुजरात के मुख्यमंत्री रहते कोई अवकाश लिया था और न अब प्रधानमंत्री रहते हुये कोई अवकाश लिया। उनकी विदेश यात्राएँ भी भारत राष्ट्र के हितों के उद्देश्य पूर्ति केलिये हुईं हैं।
पिछले दिनों सूचना के अधिकार के अंतर्गत मांगी गई जानकारी के उत्तर में यह तथ्य सामने आया। जिसकी चर्चा संपूर्ण विश्व के मीडिया जगत में हुई। बिना कोई अवकाश लिये निरन्तर कार्य करने की उनकी क्षमता की एक और विशेषता है। वह है प्रतिदिन अधिकतम समय तक कार्य करने की। वे प्रतिदिन अधिक घंटों तक कार्य करने वाले विश्व के अकेले राजनेता हैं। सामाजिक, साँस्कृतिक, प्रशासनिक, अथवा सार्वजनिक कार्यों में वे प्रतिदिन सोलह से अठारह घंटे तक व्यस्त रहकर मोदीजी 24×7 सक्रिय रहने के लिए प्रसिद्ध हैं।
उनके पद दायित्व के इन दोनों कीर्तिमानों में उनके नवाचार भी अनूठे हैं। वे अपने साहस, क्षमता, दृढ़ता, दूरदृष्टि और भारत राष्ट्र के साँस्कृतिक मूल्यों की पुनर्प्रतिष्ठा केलिये भी जाने जाते हैं। वे अपने सिद्धांतों से कभी समझौता नहीं करते और न लक्ष्य से कभी विचलित होते हैं। उनका व्यक्तित्व असाधारण है इसलिये उनके कार्य और कार्यशैली भी असाधारण है। असाधारण कार्यों के लिये प्रकृति सदैव असाधारण व्यक्तित्व को ही निमित्त बनाती है।
भारतीय वाड्मय में वैदिक ऋषियों की दिनचर्या पढ़ने को मिलती है। ऋषियों के आठों प्रहर सतत सक्रियता में व्यतीत होते थे। पूरा जीवन साधना, अध्ययन, मनन, चिंतन, नूतन अनुसंधान और समाज निर्माण केलिये बौद्धिक प्रबोधनों में बीतता था। ऋषि परंपरा के अनुरूप ही लेखन प्रवचन का जो विशाल भंडार स्वामी दयानंद सरस्वती और स्वामी विवेकानंद का उपलब्ध है वह भी अद्वितीय है। इन सबका चिंतन और कार्य असाधारण हैं। यह जिज्ञासा होना स्वाभाविक हो कि सीमित आयु सीमा में यह कैसे संभव होता है। असाधारण कार्य करने वाले व्यक्तित्व भी असाधारण होते हैं। जिन्हें प्रकृति विशिष्ठ कार्यों का निमित्त बनाती है।
ऋषि परंपरा से लेकर स्वामी विवेकानंद इस असाधारण कार्यशैली की झलक भारत के प्रधानमंत्री श्रीनरेंद्र मोदी की कार्यशैली और कार्यक्षमता में मिलती है। मोदीजी की दिनचर्या, संकल्पशीलता, ध्येयनिष्ठा, दूरदर्शी चिंतन, सत्य पर अडिगता और निरन्तरता असाधारण है। उन्होंने कुछ ऐसे नवाचार किये, कीर्तिमान बनाये जिसकी कल्पना किसी को नहीं थी। बालपन से लेकर वर्तमान काल तक श्रीनरेंद्र मोदी के कार्य और कार्यशैली दोनों विशिष्ट रहे। वे जहाँ भी रहे, उनके हाथ में जो काम रहा वहाँ उन्होंने एक नये इतिहास की रचना की है।
उनकी कार्यशैली की तीन बड़ी विशेषताएँ हैं पहली वे संकल्प सुनिश्चित कर अपनी यात्रा आरंभ करते हैं। दूसरी यह कि वे किसी भी आलोचना और राजनैतिक हमले से विचलित नहीं होते। और तीसरी सामने आई चुनौती को स्वीकार करते हैं। गुजरात के मुख्यमंत्री पद दायित्व से लेकर भारत के प्रधानमंत्री के रूप में उनकी कार्यशैली में ये तीनों विशिष्टताएँ बहुत स्पष्ट रहीं हैं। श्रीनरेंद्र मोदी के व्यक्तित्व की एक विशेषता यह भी है कि वे अपने ऊपर फेके गये पत्थरों की चुनौती स्वीकार करते हैं और उन्हीं से अपनी सुरक्षा दीवार पर भी बनाते हैं।
मोदीजी ने दिसम्बर 2022 में गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में पद दायित्व संभाला था। तब से आज तक उन पर जितने राजनैतिक हमले हुये उतने किसी राजनेता पर नहीं। ऐसे हमले केवल भारत में ही नहीं हुये अपितु दुनियाँ के कयी देशों में उनके विरुद्ध योजनापूर्वक वातावरण बनाया गया। इस आलोचना के दबाव में ही एक बार अमेरिका ने उनका बीजा निरस्त कर दिया था। उन दिनों मोदीजी गुजरात के मुख्यमंत्री थे। उन्होंने अमेरिका की इस पर कार्यवाही पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी लेकिन इसे एक चुनौती के रूप में स्वीकारा और जब वे प्रधानमंत्री बने, अमेरिका के आमंत्रण पर अमेरिका गये तो उनके सम्मान में व्हाइट हाॅउस में “डिनर” का आयोजन किया गया। अमेरिका के इतिहास में यह व्हाइट हाउस का सबसे भव्य डिनर था। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि यह पूर्ण शाकाहारी था, मांस मदिरा तो दूर अण्डे तक नहीं थे।
मोदीजी ने सामाजिक, राजनैतिक, साँस्कृतिक और प्रशासनिक निर्णयों के नवाचार में भी कुछ ऐसे कीर्तिमान बनाये हैं जिन्हें तोड़ना आने वाले किसी राजनेता के लिये संभव नहीं लगता। उन्होंने वर्ष 2014 में संसद की सीढ़ियों को प्रणाम करके अपना संसदीय जीवन आरंभ किया था। स्वतंत्रता के इतिहास में सांसद की सीढ़ियों को प्रणाम करके संसद में प्रवेश करने वाले वे पहले राजनेता हैं। मोदीजी देश के पहले ऐसे प्रधानमंत्री हैं जिनका जन्म स्वतंत्र भारत में हुआ। उनसे पहले भारत के सभी प्रधानमंत्रियों का जन्म स्वतंत्रता के पूर्व हुआ था।
वे देश के पहले ऐसे प्रधानमंत्री हैं जिन्होंने पद दायित्व संभालने से पहले भारत के अधिकांश जिला केन्द्रों की यात्रा कर ली थी। इसीलिये उनके निर्णयों भारत की विविधता, विशेषता और व्यापकता की झलक रहती है। मोदीजी देश के पहले ऐसे गैर कांग्रेसी प्रधानमंत्री हैं जिनके नेतृत्व में लगातार तीन बार बहुमत मिला और सरकार बनी। उनके प्रधानमंत्रित्व कार्यकाल में कुछ ऐसे निर्णय भी हुये जिनकी किसी को कल्पना नहीं, ये कार्य एक प्रकार से किसी स्वप्न के आकार लेने जैसे हैं।
इनमें कश्मीर से धारा 370 की समाप्ति, राम जन्मस्थान अयोध्या में रामजी की प्राण प्रतिष्ठा होना, पाकिस्तान के विरुद्ध सर्जिकल स्ट्राइक, आपरेशन सिंदूर जिसमें पाकिस्तान में घुसकर आतंकवादी ढेर किये, कोरोना महामारी में स्वदेशी वैक्सीन का निर्माण, निशुल्क टीकाकरण, स्वदेशी रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता, डिजीटल इंफ्रास्ट्रक्चर, पड़ौसी देशों से धार्मिक आधार पर प्रताड़ित नागरिकों को भारत में शरण देने का कानून बनाना, किसान सम्मान निधि, उज्जवला योजना, जनधन योजना, स्वदेशी उत्पाद को प्राथमिकता, महिला, युवा किसान और गरीब कल्याण की योजनाओं के साथ बिना किसी भेदभाव के “सबका साथ सबका विकास” का संकल्प लेकर भारत की अर्थ व्यवस्था का उन्नयन। वे इसी राह पर आगे बढ़ रहे हैं।
मोदीजी की दृढ़ता का इतना बड़ा उदाहरण विश्व में कहीं मिलेगा कि अमेरिकी टैरिफ धमकी के बाद भी भारत अपनी नीतियों पर अडिग रहा और अमेरिका को झुकना पड़ा। मोदीजी जो कदम उठाते हैं दूरदृष्टि के साथ उठाते हैं। नारी सम्मान की दिशा में महिला आरक्षण विधेयक पर विचार केलिये भले अप्रैल 2026 में संसद का विशेष सत्र बुलाया गया लेकिन इसका लक्ष्य उन्होंने बहुत पहले सुनिश्चित कर लिया था। संसद के नये भवन निर्माण का आकार इसे ध्यान रखकर ही तैयार किया गया था। इस भवन की नींव 2020 में रखी गई थी।
मोदीजी ने अपने सार्वजनिक जीवन की यात्रा भारत राष्ट्र के परम् वैभव का स्वप्न संजोकर आरंभ की थी। वे इसे कभी नहीं भूले। भारत को परम् वैभव के स्थान पर प्रतिष्ठित करने केलिये उन्होंने वर्ष 2047 का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस दिशा भारत अभी विश्व की चौथी अर्थ शक्ति के स्थान पर पहुँचा है और तीसरे क्रम पर आने के समीप है। आशा की जा रही है कि वर्ष 2035 तक भारत विश्व की प्रथम अर्थ शक्ति बनेगा और वर्ष 2047 तक विश्व का सर्वश्रेष्ठ राष्ट्र।

