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ईरान में फंसे भारतीयों की सुरक्षित निकासी के लिए भारत को मिला तेहरान का समर्थन

ईरान और इज़राइल के बीच जारी संघर्ष के बीच सोमवार को ईरान ने भारत के उस अनुरोध पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी जिसमें ईरान में फंसे भारतीय नागरिकों, विशेष रूप से छात्रों, की सुरक्षित निकासी की मांग की गई थी।

ईरानी विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि भले ही देश का हवाई क्षेत्र बंद है, लेकिन सभी ज़मीनी सीमाएं भारतीय नागरिकों के लिए खुली हैं और उनके सुरक्षित पारगमन की व्यवस्था की जा सकती है।

ईरानी अधिकारियों ने भारत के राजनयिक मिशन को यह जानकारी देते हुए कहा, “वर्तमान हालात और हवाई अड्डों के बंद होने को देखते हुए, हम सूचित करते हैं कि सभी ज़मीनी सीमाएं पार करने के लिए खुली हैं। अगर भारत अपने नागरिकों और राजनयिकों को निकालना चाहता है, तो हम आवश्यक सहयोग देंगे।”

ईरान ने भारत से अनुरोध किया है कि सीमा पार करने वाले लोगों के नाम, पासपोर्ट नंबर, वाहन का विवरण, यात्रा का समय और किस सीमा से वे बाहर निकलना चाहते हैं, इसकी पूरी जानकारी उसकी जनरल प्रोटोकॉल शाखा को दी जाए ताकि सुरक्षा प्रबंध किए जा सकें।

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ईरान में फंसे भारतीय छात्र

सूत्रों के अनुसार, ईरान के विभिन्न शहरों में हज़ारों भारतीय फंसे हुए हैं, जिनमें से लगभग 1,500 छात्र जम्मू-कश्मीर से ताल्लुक रखते हैं।

भारतीय विदेश मंत्रालय ने सोमवार को कहा कि स्थिति पर करीबी नजर रखी जा रही है और कुछ छात्रों को ईरान के भीतर ही सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया गया है। मंत्रालय ने यह भी बताया कि अन्य संभावित विकल्पों पर विचार किया जा रहा है।

तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने भारतीय नागरिकों और प्रवासी भारतीयों को सतर्क रहने, अनावश्यक यात्रा से बचने और स्थानीय अधिकारियों के निर्देशों का पालन करने की सलाह दी है। इसके अलावा, दूतावास ने सोशल मीडिया और टेलीग्राम लिंक के माध्यम से समय-समय पर अपडेट साझा करने की योजना बनाई है।

दूतावास ने ईरान में मौजूद भारतीय नागरिकों से एक गूगल फॉर्म भरने का भी आग्रह किया है, ताकि उनके संपर्क में रहा जा सके और ज़रूरत पड़ने पर उन्हें सहायता मिल सके।

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ईरान-इज़राइल टकराव की पृष्ठभूमि

शुक्रवार सुबह इज़राइल ने “ऑपरेशन राइजिंग लायन” के तहत अचानक हमला करते हुए ईरान की सैन्य कमान को निशाना बनाया और उसके परमाणु ठिकानों को नुकसान पहुंचाया। इसके जवाब में ईरान ने भी भारी पलटवार किया। बीते चार दिनों में दोनों देशों के बीच सैकड़ों मिसाइलों का आदान-प्रदान हुआ है।

जहां इज़राइल ने इस अभियान को और तेज़ करने की चेतावनी दी है, वहीं ईरान ने भी “नरक के द्वार खोलने” की धमकी दी है। ऐसे हालात में ईरान में रह रहे विदेशी नागरिकों, विशेषकर छात्रों और राजनयिकों की सुरक्षा को लेकर वैश्विक चिंता बढ़ गई है।

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