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futuredलोक-संस्कृति

छत्तीसगढ़ी लोक परम्परा में देवारी की पचरंगी छटा

छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति आज भी लोकजीवन मे संरक्षित है। सचमुच दीपावली अर्थात ‘देवारी’ छत्तीसगढ़ की संस्कृति का दर्पण है और पर्वों का महापर्व है। उजालों की फुलवारी देवारी सदैव खिलती रहे महकती रहे।

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futuredधर्म-अध्यात्महमारे नायक

चिंतक विचारक और 1857 की क्रांति अग्रदूत महान साधक महर्षि दयानंद सरस्वती : पुण्यतिथि विशेष

स्वामी दयानन्द सरस्वती को बहुत विरोध का सामना करना पड़ा। यह विरोध दोनों तरफ से था एक ओर धर्मान्तरित हिन्दुओः की घर वापसी केलिये और दूसरी ओर आडंबर मुक्ति अभियान के लिये भी। और इसी कुचक्र के अंतर्गत उन्होंने देह त्यागी। एक वेश्या के कुचक्र से हुआ। कहते हैं षड्यंत्र कारियों ने स्वामी जी के रसोइये को लालच देकर अपनी ओर मिला लिया और दूध में विष मिलाकर स्वामी जी को पिला दिया।

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futuredसम्पादकीय

मांगलिक अवसरों पर गृह अलंकरण की प्राचीन परम्परा

रंगोली दीपावली की साज सज्जा का प्रमुख आकर्षण होता है, वैसे द्वार सज्जा के लिए पत्र पुष्पों का भी प्रयोग करने प्राचीन परम्परा रही है। जिसका प्रयोग हम आज भी आम की तोरण/बंदनवार रुप में परम्परा से करते आ रहे हैं।

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futuredताजा खबरें

पीएम मोदी ने ₹12,850 करोड़ की स्वास्थ्य परियोजनाओं का शुभारंभ, आयुष्मान भारत योजना का वृद्धों के लिए विस्तार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार, 29 अक्टूबर 2024 को ₹12,850 करोड़ की विकास परियोजनाओं का शुभारंभ किया और 70 वर्ष से ऊपर के सभी वरिष्ठ नागरिकों के लिए आयुष्मान भारत स्वास्थ्य बीमा योजना का विस्तार किया।

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futuredछत्तीसगढ

युवाओं के लिए संवैधानिक साक्षरता पर रोविंग सेमिनार

रोविंग सेमिनार पहल, आकर्षक और इंटरैक्टिव सत्रों के माध्यम से, भारतीय संविधान के मूल्यों के प्रति आदरांजलि के रूप में छत्तीसगढ़ के कई स्कूलों में भी आयोजित की जाएगी।

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futuredसमाज

एक और उलगुलान-डी-लिस्टिंग के सूत्रधार जनजातीय उद्धारक बाबा कार्तिक उरांव

ऐसे में यह प्रश्न उठता है कि वह जनजातीय कहां रह जाता है? वह तो ईसाई बन जाता है। फिर ऐसे व्यक्ति को आरक्षण इत्यादि का लाभ क्यों मिले? यही यक्ष प्रश्न आज भी खड़ा हुआ है।

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