Author: News Editor

futuredलोक-संस्कृति

प्रदर्शन कलाओं में रघुनंदन

जनजातीय संस्कृति का भी रामायण से नज़दीकी रिस्ता है। यहाँ कातकरी खुद को वानर सेना का वंशज मानते हैं। भील माता शबरी को अपना वंशज मानते हैं।सह्याद्रि क्षेत्र के वनवासी हर साल बोहाडा उत्सव मनाते हैं।

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futuredविश्व वार्ता

दुनिया में तेजी से फैल रहा है सनातन हिंदू धर्म

आज सनातन हिंदू धर्म के प्रति विदेशी लोग आकर्षित हो रहे हैं, क्योंकि सनातन हिंदू धर्म का अपना एक अलग ही महत्व है। सनातन हिंदू धर्म में कुटुंब के प्रति वफादारी बचपन से ही सिखाई जाती है। भारत में आज भी संयुक्त परिवार की प्रथा प्रचलन में हैं, जिससे बच्चे अपने बचपन में ही अपने माता पिता की सेवा करने के संस्कार सीखते हैं और उन्हें पूरे जीवन भर अपने साथ रखने का संकल्प लेते हैं।

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futuredसाहित्य

साहित्य संदेश देता है उपदेश नहीं : डॉ.चित्तरंजन कर

“भाषा संस्कृति है और संस्कृति खेती है,जिसकी फसल साहित्य है। लेकिन साहित्य संदेश देता है, उपदेश नहीं।” ये शब्द प्रसिद्ध भाषाविद और विद्वान साहित्यकार डा.चित्तरंजन कर के हैं ,जो वे विगत दिनों तिल्दा-नेवरा में आयोजित समन्वय साहित्य परिवार छत्तीसगढ़ के 29 वें वार्षिक महोत्सव में मुख्य अभ्यागत की आसंदी से बोल रहे थे।

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futuredखबर राज्यों सेपॉजिटिव स्टोरी

दो दशकों की खींचतान के बाद भारतीय हुई आर्य सभ्यता

एनसीईआरटी में पढ़ाए जाने वाले भारत के इतिहास में आर्य अब आक्रमणकारी नहीं बल्कि भारतीय मूल के रूप में जाने जाएंगे। 21 साल की खींचतान और दुनियाभर में हुए अध्ययनों के बाद अंततः यह तय हो गया कि ‘आर्य ‘सभ्यता’ भारतीय ही थी।

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futuredसाहित्य

डॉ. निरुपमा सरमा अउ उंकर बाल कविता

छत्तीसगढ़िया सब ले बढ़िया। एमन सरल सुभाव के होथे उन मिलनसार होथे, बासी खाके खेत म अन्न उगाथे,अपन घर पहुना ल बासी खवाके प्रेम से बिदा करथे, खुदे उघरा रइथे , आने ल तन ढंके बर ओन्हा देथें। छलकपट कभू नइ जानै फेर सच कहे बर फुर बोलिक होथे , देस भक्ति के रूप म उन तिरंगा झंडा के गुणगान करथें

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futuredधर्म-अध्यात्म

स्त्रीत्व का उत्सव गणगौर

राजस्थान, हरियाणा और मध्य प्रदेश सहित भारत के उत्तरी प्रांतों का लोकप्रिय पर्व गणगौर गाँव-घर से जोड़ने वाला उत्सव है। महिलाओं के मन-जीवन में उल्लास और अपनेपन का संचार करने वाला लोक उत्सव है। अपनों की कुशलता और सौभाग्य की कामना के लिए गण और गौर के रूप में भगवान शिव और माता पार्वती

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