छुरिया में डॉ. भीमराव अंबेडकर जयंती पर परिचर्चा और काव्य गोष्ठी सम्पन्न, साहित्यकारों ने सामाजिक समरसता का दिया संदेश
छुरिया (जिला राजनांदगांव), 22 अप्रैल 2026। पुरवाही साहित्य समिति पाटेकोहरा (छुरिया) द्वारा भारतीय संविधान के महान शिल्पकार और देश के प्रथम कानून मंत्री डॉ. भीमराव अंबेडकर की 135वीं जयंती के अवसर पर दो सत्रों में गरिमामय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन सरस्वती शिशु मंदिर परिसर, पाटेकोहरा में किया गया, जिसमें पहले सत्र में मासिक परिचर्चा और दूसरे सत्र में काव्य गोष्ठी सम्पन्न हुई।
कार्यक्रम का संयोजन पुरवाही साहित्य समिति के पूर्व अध्यक्ष शिवप्रसाद लहरे द्वारा किया गया। प्रथम सत्र की परिचर्चा का विषय था— “सामाजिक क्रांति के प्रतीक और संविधान निर्माता भीमराव अंबेडकर”। इस सत्र के मुख्य अतिथि शिवनाथ साहित्य धारा डोंगरगांव के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ साहित्यकार महेंद्र कुमार बघेल ‘मधु’ थे, जबकि अध्यक्षता मोहला के वरिष्ठ साहित्यकार एवं वनांचल साहित्य समिति के सचिव जितेंद्र कुमार पटेल ‘विद्रोही’ ने की।
विशिष्ट अतिथि एवं वक्ता के रूप में वीरेंद्र कुमार तिवारी ‘वीरू’, डॉ. इकबाल खान ‘तन्हा’, ओमप्रकाश साहू ‘अंकुर’ तथा दिनेश कुमार कुरेटी ‘दिलेर’ उपस्थित रहे। कार्यक्रम की शुरुआत स्वागत भाषण से हुई, जिसमें संयोजक शिवप्रसाद लहरे ने पुरवाही साहित्य समिति की स्थापना से लेकर पिछले दस वर्षों की साहित्यिक गतिविधियों—मासिक गोष्ठियों, परिचर्चाओं, वार्षिक समारोहों एवं कवि सम्मेलनों—का उल्लेख करते हुए इसकी विशिष्ट पहचान पर प्रकाश डाला।
आधार वक्तव्य समिति के सचिव हेमलाल सहारे ने प्रस्तुत किया। वक्ताओं ने डॉ. भीमराव अंबेडकर के जीवन, संघर्ष और उनके सामाजिक योगदान को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
मुख्य अतिथि महेंद्र कुमार बघेल ने कहा कि डॉ. अंबेडकर के विचारों की वास्तविक सार्थकता तभी है जब उन्हें जीवन में आत्मसात किया जाए। उन्होंने साहित्यकारों को समाज का सचेतक बताते हुए कहा कि छुआछूत जैसी कुरीतियों को समाप्त करना बुद्धिजीवी वर्ग की जिम्मेदारी है।
अध्यक्षीय उद्बोधन में जितेंद्र कुमार पटेल ने डॉ. अंबेडकर की अद्वितीय प्रतिभा और संविधान निर्माण में उनके योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि विरोधी भी उनकी मेधा के कायल थे और उन्होंने सामाजिक समानता के लिए ऐतिहासिक कार्य किए।
अन्य वक्ताओं ने भी अपने विचार रखते हुए कहा कि डॉ. अंबेडकर का जीवन संघर्ष, शिक्षा और सामाजिक न्याय के लिए समर्पण का प्रतीक है। उन्होंने समाज में व्याप्त भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाई और वंचित वर्गों को अधिकार दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
कार्यक्रम के द्वितीय सत्र में काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसकी अध्यक्षता वरिष्ठ गीतकार अरविंद कुमार लाल ‘लमसेना’ ने की। इस सत्र में कवियों ने गीत, कविता और ग़ज़ल के माध्यम से अपनी रचनाएँ प्रस्तुत कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। काव्य पाठ करने वालों में अलख राम यादव, महेंद्र बघेल ‘मधु’, जितेंद्र पटेल, अरविंद कुमार लाल, डॉ. इकबाल खान, वीरेंद्र तिवारी, दिनेश कुरेटी ‘दिलेर’, ओमप्रकाश साहू ‘अंकुर’, कोमल सिंह गुरु, कुलेश्वर दास साहू, वेदराम पटेल, राजेंद्र कुमार साहू, शिवप्रसाद लहरे, नंदकुमार साहू ‘नादान’, जशवंत कुमार मंडावी, हेमलाल सहारे, मोतीराम फलेंद्र और सेवक सिन्हा शामिल रहे।
कार्यक्रम में नारायण सिन्हा, राजकुमार सिन्हा, भावेश जी, जयकुमार सिन्हा सहित बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे। परिचर्चा का संचालन नंदकुमार साहू ‘नादान’ ने किया, जबकि काव्य गोष्ठी का संचालन कोमल सिंह गुरु और राजेंद्र कुमार साहू ने संयुक्त रूप से किया। अंत में शिवप्रसाद लहरे ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया।
