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तेंदूपत्ता संग्राहकों के लिए बड़ी सौगात: आय बढ़ाने की दिशा में सरकार का अहम कदम, 920 करोड़ भुगतान का अनुमान

छत्तीसगढ़ में तेंदूपत्ता, जिसे ‘हरा सोना’ कहा जाता है, से जुड़े लाखों वनवासियों और आदिवासी परिवारों के लिए सरकार ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। नई नीतियों और दरों में बढ़ोतरी के चलते इस वर्ष संग्राहकों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है। अनुमान है कि तेंदूपत्ता संग्रहण से जुड़े परिवारों को करीब 920 करोड़ रुपये का भुगतान किया जाएगा।

राज्य में लगभग 13 लाख से अधिक परिवार तेंदूपत्ता संग्रहण कार्य से जुड़े हुए हैं। वन मंत्री श्री केदार कश्यप के निर्देश पर सरकार ने लघु वनोपज संग्राहकों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से संग्रहण दर में वृद्धि की है। वर्ष 2024 से प्रति मानक बोरा की दर 4,000 रुपये से बढ़ाकर 5,500 रुपये कर दी गई है, जिससे सीधे तौर पर ग्रामीणों को लाभ मिल रहा है।

व्यापक स्तर पर संग्रहण की तैयारी

वर्ष 2026 में राज्य के 31 जिला वनोपज सहकारी यूनियनों के तहत 900 से अधिक प्राथमिक समितियों में तेंदूपत्ता संग्रहण प्रस्तावित है। इस साल करीब 15 लाख मानक बोरा तेंदूपत्ता संग्रहण का लक्ष्य रखा गया है। एक मानक बोरे में 1,000 गड्डियां होती हैं और हर गड्डी में 50 पत्ते शामिल होते हैं।

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बस्तर में बढ़ी भागीदारी

बस्तर संभाग में इस कार्य से जुड़े परिवारों की संख्या लगातार बढ़ रही है। पिछले वर्ष के मुकाबले इस बार 14 हजार से अधिक नए परिवार इस कार्य में शामिल हुए हैं। यहां लगभग 4 लाख मानक बोरा संग्रहण का लक्ष्य तय किया गया है, जबकि अन्य क्षेत्रों में करीब 11 लाख मानक बोरा संग्रहण की संभावना है।

नए फड़ों की स्थापना और बेहतर व्यवस्था

नारायणपुर के अबूझमाड़ क्षेत्र में पहली बार 10 नए फड़ स्थापित किए गए हैं, जहां 2,000 से अधिक मानक बोरा संग्रहण का अनुमान है। इसके अलावा सुकमा और केशकाल क्षेत्रों में भी नए फड़ जोड़े गए हैं। पिछले साल सुरक्षा कारणों से जहां कुछ स्थानों पर संग्रहण बाधित रहा था, इस बार सभी फड़ों में सुचारू संचालन सुनिश्चित करने के प्रयास किए गए हैं।

पारदर्शी भुगतान और आधुनिक व्यवस्था

संग्रहण कार्य को सुगम बनाने के लिए सरकार ने आवश्यक संसाधनों जैसे संग्राहक कार्ड, बोरे, गोदाम और परिवहन की व्यवस्था की है। साथ ही, भंडारण का बीमा भी कराया जा रहा है। भुगतान प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए ऑनलाइन सॉफ्टवेयर प्रणाली लागू की गई है, जिसके माध्यम से राशि सीधे संग्राहकों के बैंक खातों में डीबीटी के जरिए भेजी जाएगी।

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ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा बल

सरकार की इस पहल से न केवल तेंदूपत्ता संग्राहकों की आय में वृद्धि होगी, बल्कि ग्रामीण और आदिवासी अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। यह कदम प्रदेश में आजीविका के साधनों को सुदृढ़ करने और जीवन स्तर सुधारने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।