futuredपुस्तक समीक्षा

संघ की सौ वर्ष की यात्रा, आवश्यकता और लक्ष्य को उकेरती महत्त्वपूर्ण कृति

उमेश कुमार चौरसिया

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में 26, 27 एवं 28 अगस्त 2025 को नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में आयोजित तीन दिवसीय व्याख्यानमाला में संघ के परम पूजनीय सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने देश-विदेश से आए विशिष्ट अतिथियों एवं प्रबुद्ध नागरिकों को संबोधित किया। इन तीनों दिनों के विचारोत्तेजक एवं मार्गदर्शी व्याख्यानों का संकलन ‘100 वर्ष की संघ यात्रा : नए क्षितिज’ शीर्षक से पुस्तकाकार प्रकाशित किया गया है। यह पुस्तक संघ के शताब्दी वर्ष में उसके वैचारिक आधार, कार्यपद्धति, सामाजिक भूमिका तथा भावी दिशा को समझने का प्रामाणिक दस्तावेज़ प्रस्तुत करती है।

पुस्तक के प्रथम व्याख्यान में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की ऐतिहासिक आवश्यकता, डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार के राष्ट्रदृष्टि सम्पन्न व्यक्तित्व तथा “संपूर्ण हिन्दू समाज के संगठन” के संकल्प का विस्तृत विवेचन किया गया है। साथ ही हिन्दू संस्कृति की मूल अवधारणा, हिन्दू होने के व्यापक अर्थ, संघ की व्यक्ति निर्माण की कार्यपद्धति तथा गुरुदक्षिणा की समर्पण परंपरा को सहज और स्पष्ट रूप में समझाया गया है।

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दूसरे व्याख्यान में “आत्मनो मोक्षार्थम् जगत् हिताय च” के जीवन-दर्शन को आधार बनाते हुए स्वयंसेवकों के सामाजिक दायित्व, संघ शताब्दी के लक्ष्य, समाज जीवन में अपेक्षित पंच परिवर्तन, सामाजिक समरसता, परिवार प्रबोधन, स्वदेशी, पर्यावरण संरक्षण तथा नागरिक कर्तव्यों जैसे विषयों पर विस्तार से विचार प्रस्तुत किए गए हैं। इसमें संघ की दृष्टि से राष्ट्र निर्माण में समाज की सक्रिय भागीदारी की आवश्यकता को भी रेखांकित किया गया है।

पुस्तक का तीसरा भाग प्रश्नोत्तर सत्र पर आधारित है, जिसमें सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने अनेक समसामयिक जिज्ञासाओं और भ्रांतियों का तार्किक एवं तथ्याधारित समाधान प्रस्तुत किया है। इसमें वैदिक गुरुकुल परंपरा एवं नई शिक्षा नीति, भारतीय ज्ञान परंपरा, संघ और भाजपा के संबंध, अखण्ड भारत की अवधारणा, विभिन्न पंथों के प्रति संघ का दृष्टिकोण, सामाजिक समरसता, स्वतंत्रता आंदोलन में संघ की भूमिका, विदेशों में संघ का कार्य तथा अनेक राष्ट्रीय विषयों पर संघ की विचारधारा और कार्यप्रणाली को स्पष्ट किया गया है।

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सरल भाषा, सुव्यवस्थित प्रस्तुति तथा समसामयिक संदर्भों से युक्त यह पुस्तक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष की पृष्ठभूमि में उसकी सौ वर्षों की यात्रा, विचार-दर्शन, संगठनात्मक विकास तथा भविष्य की दिशा को समझने के इच्छुक पाठकों के लिए अत्यंत उपयोगी और संग्रहणीय कृति है।

पुस्तक: 100 वर्ष की संघ यात्रा : नए क्षितिज
प्रकाशक: सुरूचि प्रकाशन, नई दिल्ली
पृष्ठ: 104
मूल्य: ₹50.00

— उमेश कुमार चौरसिया