futuredराजनीति

जनसंघ से भाजपा तक: राष्ट्रवाद और विकासवाद की यात्रा

आचार्य ललित मुनि

भारतीय जनता पार्टी के स्थापना दिवस पर प्रस्तुत यह लेख 1980 से अब तक की राजनीतिक, वैचारिक और संगठनात्मक यात्रा का विश्लेषण करता है। जनसंघ की पृष्ठभूमि, एकात्म मानववाद की अवधारणा, राष्ट्रवाद और विकासवाद के समन्वय तथा विभिन्न नीतिगत पहलों के माध्यम से पार्टी के विस्तार को समझने का प्रयास किया गया है।

भारत की राजनीति के व्यापक परिदृश्य में 6 अप्रैल 1980 का दिन एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक क्षण के रूप में दर्ज है। इसी दिन भारतीय जनता पार्टी की स्थापना हुई, जिसने आने वाले दशकों में भारतीय लोकतंत्र की दिशा और विमर्श को गहराई से प्रभावित किया। जनसंघ की वैचारिक पृष्ठभूमि से विकसित यह संगठन राष्ट्रवाद, सांस्कृतिक चेतना और लोकतांत्रिक मूल्यों के समन्वय का प्रतीक बनकर उभरा। स्थापना के समय से ही पार्टी ने स्वयं को केवल एक राजनीतिक दल के रूप में नहीं, बल्कि एक वैचारिक आंदोलन के रूप में प्रस्तुत किया, जिसका उद्देश्य राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए समाज के व्यापक विकास को सुनिश्चित करना था।

भारतीय जनता पार्टी की जड़ें भारतीय जनसंघ में निहित हैं, जिसकी स्थापना 1951 में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने की थी। जनसंघ ने राष्ट्र की सांस्कृतिक एकता और अखंडता को सर्वोपरि मानते हुए एक वैचारिक आधार प्रस्तुत किया। समय के साथ राजनीतिक परिस्थितियों में परिवर्तन हुआ और 1980 में भारतीय जनता पार्टी के रूप में एक नए संगठन का गठन हुआ। यह केवल नाम परिवर्तन नहीं था, बल्कि विचारों को व्यापक सामाजिक आधार देने का प्रयास भी था। पार्टी ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय के एकात्म मानववाद को अपना मार्गदर्शक सिद्धांत बनाया, जिसमें व्यक्ति और समाज के संतुलित विकास की अवधारणा निहित है।

यह भी पढ़ें  क्या माता-पिता की मौत के बाद तलाक लेने पर बेटी को मिल सकती है फैमिली पेंशन? त्रिपुरा हाई कोर्ट का बड़ा फैसला

स्थापना के प्रारंभिक वर्षों में पार्टी को अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ा। 1984 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को केवल दो सीटें प्राप्त हुईं, किंतु संगठन ने इसे आत्ममंथन का अवसर माना। कार्यकर्ताओं ने देशभर में वैचारिक संवाद और संगठन विस्तार का कार्य जारी रखा। धीरे-धीरे पार्टी ने स्वयं को एक वैकल्पिक राजनीतिक शक्ति के रूप में स्थापित किया।

1990 के दशक में भाजपा के राजनीतिक विस्तार का नया चरण प्रारंभ हुआ। विभिन्न जनआंदोलनों और राजनीतिक अभियानों के माध्यम से पार्टी ने अपने जनाधार को मजबूत किया। 1996 में भाजपा लोकसभा की सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी और अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में सरकार बनी, यद्यपि वह अल्पकालिक रही। 1998 और 1999 में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के सहयोग से स्थिर सरकार का गठन हुआ।

इस कालखंड में राष्ट्रीय सुरक्षा और आधारभूत संरचना के क्षेत्र में महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। पोखरण परमाणु परीक्षण ने भारत की सामरिक क्षमता को विश्व के सामने स्थापित किया। स्वर्ण चतुर्भुज परियोजना के माध्यम से देश में सड़क संपर्क का व्यापक विस्तार हुआ। दूरसंचार क्षेत्र में परिवर्तन के कारण मोबाइल और संचार सेवाएँ आम नागरिक तक पहुँचीं।

2004 के चुनाव में पराजय के बाद भाजपा ने संगठनात्मक स्तर पर पुनः स्वयं को मजबूत करने पर बल दिया। विभिन्न राज्यों में संगठन का विस्तार हुआ और नए नेतृत्व का उदय हुआ। पार्टी ने विकास, सुशासन और जनभागीदारी के मुद्दों को प्रमुखता दी।

2014 का लोकसभा चुनाव भारतीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में देखा जाता है। नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा को पूर्ण बहुमत प्राप्त हुआ। इस काल में वित्तीय समावेशन, स्वच्छता, आवास, स्वास्थ्य और डिजिटल संरचना से संबंधित अनेक योजनाएँ प्रारंभ की गईं। जन धन योजना, स्वच्छ भारत अभियान, उज्ज्वला योजना, आयुष्मान भारत योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना और डिजिटल इंडिया जैसे कार्यक्रमों का उद्देश्य सामाजिक और आर्थिक स्तर पर व्यापक परिवर्तन लाना रहा।

यह भी पढ़ें  जनरल बोगी : आम इंसानों की रेल यात्रा का आँखों देखा हाल

आधारभूत संरचना के क्षेत्र में सड़कों, रेलवे, हवाई अड्डों और डिजिटल नेटवर्क का विस्तार हुआ। डिजिटल भुगतान प्रणाली और स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा दिया गया। आत्मनिर्भर भारत अभियान के माध्यम से स्थानीय उत्पादन और आर्थिक सशक्तिकरण पर बल दिया गया।

संवैधानिक और विधिक स्तर पर भी महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। अनुच्छेद 370 से संबंधित प्रावधानों में परिवर्तन कर जम्मू-कश्मीर को भारतीय संविधान की मुख्यधारा में पूर्ण रूप से समाहित किया गया। तीन तलाक से संबंधित कानून के माध्यम से मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों की रक्षा का प्रयास किया गया। विदेश नीति के क्षेत्र में भारत की सक्रिय भागीदारी वैश्विक मंचों पर दिखाई दी।

2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को पुनः स्पष्ट जनादेश प्राप्त हुआ। 2024 के चुनाव में पार्टी ने गठबंधन के सहयोग से सरकार का गठन किया। यह स्थिति भारतीय लोकतंत्र में गठबंधन राजनीति की निरंतरता को दर्शाती है।

भाजपा स्वयं को एक कार्यकर्ता आधारित संगठन के रूप में प्रस्तुत करती है। विभिन्न सामाजिक योजनाओं और कार्यक्रमों के माध्यम से समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुँचने का प्रयास किया गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल, आवास और स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता बढ़ाने के प्रयास किए गए हैं।

यह भी पढ़ें  गुजरात हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: जज और कोर्ट स्टाफ के लिए एआई के उपयोग पर सख्त रोक

राष्ट्रवाद और विकासवाद को परस्पर पूरक अवधारणाओं के रूप में प्रस्तुत किया गया है। एकात्म मानववाद का सिद्धांत व्यक्ति, समाज और राष्ट्र के संतुलित विकास पर बल देता है। संगठनात्मक विस्तार, वैचारिक निरंतरता और राजनीतिक अनुभव ने पार्टी को भारतीय राजनीति में एक प्रमुख स्थान प्रदान किया है।

भविष्य की दृष्टि से विकसित भारत की परिकल्पना प्रस्तुत की गई है, जिसमें आर्थिक प्रगति, सामाजिक समावेशन और सांस्कृतिक आत्मविश्वास का समन्वय हो। 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने का लक्ष्य इसी दिशा में एक दीर्घकालिक दृष्टिकोण को दर्शाता है।

45 वर्षों की यह यात्रा भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण राजनीतिक प्रवाह को प्रतिबिंबित करती है। स्थापना दिवस का अवसर इस यात्रा का पुनरावलोकन करने और भविष्य की दिशा पर विचार करने का अवसर प्रदान करता है।