आर्थिक अभाव से उभरकर वेटलिफ्टिंग में चमके झारखंड के बाबूलाल हेम्ब्रम
सीमित संसाधनों और आर्थिक कठिनाइयों के बीच भी अगर हौसला मजबूत हो, तो सफलता की राह खुद बन जाती है। झारखंड के युवा वेटलिफ्टर बाबूलाल हेम्ब्रम इसी का जीता-जागता उदाहरण हैं, जिन्होंने संघर्ष और मेहनत के बल पर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है।
रामगढ़ जिले के केरिबांदा गांव से ताल्लुक रखने वाले बाबूलाल का सफर आसान नहीं रहा। शुरुआत में संसाधनों की कमी के कारण उन्होंने निर्माण स्थलों पर उपलब्ध बांस और लोहे की रॉड से ही अभ्यास करना शुरू किया। बाद में कोच गुरविंदर सिंह के मार्गदर्शन में उन्होंने वेटलिफ्टिंग को गंभीरता से अपनाया और अपने खेल को निखारना शुरू किया।
बेहतर प्रशिक्षण की तलाश में बाबूलाल ने झारखंड स्टेट स्पोर्ट्स प्रमोशन सोसाइटी के प्रशिक्षण केंद्र में प्रवेश लिया। यहां तक पहुंचने के लिए वे रोजाना लगभग 60 किलोमीटर का सफर तय करते थे, जो उनके समर्पण को दर्शाता है।
महज 19 साल की उम्र में बाबूलाल ने कई उपलब्धियां हासिल की हैं। वर्ष 2024 में खेलो इंडिया यूथ गेम्स 2024 में 49 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर उन्होंने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। इसके अलावा उन्होंने आईडब्ल्यूएफ वर्ल्ड यूथ वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप और एशियन जूनियर व यूथ वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में भी पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया है।
हाल ही में खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 में बाबूलाल ने पुरुषों के 60 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक हासिल किया, जो उनके बढ़ते आत्मविश्वास का संकेत है।
पारिवारिक पृष्ठभूमि की बात करें तो उनके परिवार की आर्थिक स्थिति ज्यादा मजबूत नहीं रही। उनकी मां एक स्थानीय स्कूल में रसोइया के रूप में कार्यरत हैं, जबकि पिता छोटे-मोटे काम करके परिवार का पालन-पोषण करते हैं। इन चुनौतियों के बावजूद बाबूलाल ने अपने लक्ष्य से कभी ध्यान नहीं हटने दिया।
वर्तमान में बाबूलाल पटियाला में राष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविर का हिस्सा हैं और सीनियर स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करने की तैयारी कर रहे हैं। उनका सपना कॉमनवेल्थ गेम्स, एशियन गेम्स और विश्व चैंपियनशिप जैसे बड़े मंचों पर देश के लिए पदक जीतना है।

