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एक्साइज ड्यूटी घटी, फिर भी नहीं सस्ते होंगे पेट्रोल-डीजल—सरकार ने बताई वजह

केंद्र सरकार द्वारा पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में बड़ी कटौती किए जाने के बावजूद आम लोगों को फिलहाल कीमतों में सीधी राहत नहीं मिलेगी। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह कदम ईंधन को सस्ता करने के बजाय अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती कीमतों के असर को नियंत्रित करने के लिए उठाया गया है।

हाल ही में सरकार ने पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी को ₹13 से घटाकर ₹3 प्रति लीटर कर दिया है, जबकि डीजल को एक्साइज ड्यूटी से पूरी तरह मुक्त कर दिया गया है। इसके बावजूद देशभर में पेट्रोल-डीजल के दाम मौजूदा स्तर पर ही बने रहेंगे।

क्यों स्थिर रहेंगे दाम?

सरकार के अनुसार, पश्चिम एशिया में जारी तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में सप्लाई से जुड़ी आशंकाओं के चलते कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है, जिससे तेल कंपनियों की लागत में भारी बढ़ोतरी हुई है।

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ऐसी स्थिति में एक्साइज ड्यूटी में कटौती कर सरकार ने तेल कंपनियों पर पड़ने वाले दबाव को कम किया है, ताकि वे उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ न डालें और कीमतों में और बढ़ोतरी न हो।

सरकार का पक्ष

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि इस फैसले का मकसद देश में ईंधन की उपलब्धता बनाए रखना और संभावित मूल्य वृद्धि से उपभोक्ताओं को बचाना है।

वहीं, पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने जानकारी दी कि बीते कुछ हफ्तों में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है, जो वैश्विक बाजार में अस्थिरता का संकेत है।

निर्यात पर बढ़ाया गया शुल्क

सरकार ने घरेलू आपूर्ति को प्राथमिकता देने के लिए डीजल के निर्यात पर ₹21.5 प्रति लीटर और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) पर ₹29.5 प्रति लीटर का अतिरिक्त शुल्क लगाया है। इसका उद्देश्य देश के भीतर ईंधन की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करना है।

प्रमुख शहरों में कीमतें

फिलहाल देश के प्रमुख शहरों में पेट्रोल-डीजल के दाम इस प्रकार बने हुए हैं—

  • दिल्ली: पेट्रोल ₹94.77, डीजल ₹87.67
  • नोएडा: पेट्रोल ₹94.85, डीजल ₹87.98
  • मुंबई: पेट्रोल ₹103.54, डीजल ₹90.03
  • चेन्नई: पेट्रोल ₹100.80, डीजल ₹92.38
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सरकार ने खुद उठाया बोझ

विशेषज्ञों के अनुसार, सरकार के पास दो विकल्प थे—या तो वैश्विक कीमतों के अनुरूप ईंधन महंगा किया जाए, या फिर राजस्व में कमी स्वीकार कर कीमतों को स्थिर रखा जाए। सरकार ने दूसरा रास्ता चुना है।

इस फैसले का सीधा मतलब यह है कि फिलहाल पेट्रोल-डीजल सस्ते नहीं होंगे, लेकिन कीमतों में और बढ़ोतरी भी नहीं होगी। यानी यह कदम महंगाई से बचाव के तौर पर देखा जा रहा है, न कि तत्काल राहत के रूप में।