सायकिल है स्वास्थ्यवर्धक और पर्यावरण हितैषी वाहन

(ब्लॉगर एवं पत्रकार )
पेट्रोल और सोलर एनर्जी से चलने वाले दो चक्के के वाहनों की तुलना में सड़कों पर यातायात का सबसे सस्ता साधन है सायकिल। आधुनिक युग में बाकी सब दोपहिया गाड़ियों को तो मशीनें चलाती हैं, उनमें सिर्फ किक मारना और बैठकर हैंडल और एक्सेलेटर को संभालना होता है। बैठे-बैठे ही आप कहीं से कहीं पहुँच जाते हैं, लेकिन सायकिल चलाने के लिए आपको लगातार पैडल मारकर मेहनत करनी पड़ती है।
सेहत की दृष्टि से देखें तो यह मेहनत बहुत लाभदायक होती है। इसके कई फायदे हैं, जो मशीनों से चलने वाले दोपहिया वाहनों में नहीं हैं। सायकिल में आखिर खर्चा ही कितना है? घर में रखे किसी पुराने और अनुपयोगी कपड़े से उसकी बॉडी की साफ-सफाई कीजिए, चैन को थोड़ा चेक कर लीजिए और उसके दोनों चक्कों में हवा भरकर शान से निकल पड़िए!
पहले तो नवमी-दसवीं कक्षाओं में पहुँचते ही बच्चे अपने माता-पिता से सायकिल खरीदवाने की जिद करते थे। आज की पीढ़ी के बच्चे हजारों रुपये कीमत वाली मोटरसायकिल मांगते हैं, जिसमें हर महीने सैकड़ों रुपये का पेट्रोल डलवाने का खर्च अलग से होता है, जबकि एक बार खरीदने के बाद सायकिल के दोनों चक्कों में हवा डलवाने, कभी-कभार ऑयलिंग और टायर-ट्यूब बदलने का ही तो खर्चा है, जो नाम मात्र का होता है। पेट्रोल-डीजल की जरूरत नहीं होने के कारण सायकिल एक धुआँरहित, पर्यावरण हितैषी वाहन है।
इस भयानक महँगाई के कठिन समय में डीजल, पेट्रोल की लगातार बढ़ती कीमतों का मुकाबला करना हो तो हमें अपने सामान्य काम-काज के लिए सायकिल का उपयोग करना चाहिए। अपनी सेहत ठीक रखना चाहते हैं तो प्रतिदिन कुछ किलोमीटर सायकिल जरूर चलाइए।
विज्ञान और प्रौद्योगिकी के नये-नये आविष्कारों से इस युग में आवागमन के इतने अधिक आरामदायक साधन विकसित हो चुके हैं कि आज का इंसान दो-चार किलोमीटर आने-जाने के लिए भी अपने पैरों को तकलीफ नहीं देना चाहता। सायकिल अब उसकी प्राथमिकता में नहीं है। फलस्वरूप, कुछ एक अपवादों को छोड़कर वह विलुप्त होती जा रही है, जबकि वह हमें न्यूनतम खर्च पर अधिकतम सेहत दे सकती है।
आज विश्व सायकिल दिवस के मौके पर दुनिया के सबसे कम खर्चीले इस वाहन को एक बार फिर लोकप्रिय बनाने के बारे में सोचने की जरूरत है। संयुक्त राष्ट्र संघ के निर्णय के अनुसार 3 जून 2018 से हर साल विश्व साइकिल दिवस मनाया जा रहा है। लेकिन डीजल, पेट्रोल से चलने वाली तमाम गाड़ियों की इस भीड़ में और उनके कर्णभेदी शोर में लगता है कि सायकिल कहीं खो गई है। विश्व सायकिल दिवस पर समाज में जागरूकता बढ़ाने वाले कार्यक्रमों की चर्चा कम ही सुनने-पढ़ने को मिलती है।
आज के समय में डीजल-पेट्रोल आधारित वाहनों की वजह से वायु और ध्वनि प्रदूषण बढ़ता जा रहा है। इससे पर्यावरण तहस-नहस हो रहा है, जबकि सायकिल को लेकर ऐसी कोई शिकायत नहीं हो सकती।
स्वास्थ्य की दृष्टि से सायकिल चलाने के क्या फायदे हैं, यह बताने की जरूरत नहीं है। लेकिन जरूरत इस बात की है कि हम दिन-प्रतिदिन की जिंदगी में सायकिल को भी शामिल करें। अगर कोई ऐसी जरूरत हो, जिसके लिए दो-चार किलोमीटर जाना-आना हो, तो हमें सायकिल का ही इस्तेमाल करना चाहिए।
सायकिल के प्रचलन को बढ़ावा देने के लिए सरकारी और निजी क्षेत्र के कार्यालयों में कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए प्रोत्साहनमूलक नीतियाँ बनाकर उन्हें प्रभावी ढंग से लागू करना चाहिए। हालांकि, भारत में कई राज्य सरकारों द्वारा बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए हाई स्कूलों की छात्राओं को निःशुल्क सायकिल देने की योजना भी संचालित की जा रही है, जो वाकई सराहनीय है। सायकिल चलाने से हाथ-पैरों का व्यायाम अपने-आप हो जाता है। इस लिहाज से यह एक स्वास्थ्यवर्धक वाहन भी है। आजकल तो कई तरह की डिजाइनर सायकिलें भी आ गई हैं।
सायकिल चलाने वाले हर व्यक्ति की हमें तारीफ करनी चाहिए कि वह अपनी सेहत को बेहतर बना रहा है और पर्यावरण को साफ-सुथरा बनाने में भी जाने-अनजाने अपना महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।

