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आठवें वेतन आयोग की प्रक्रिया में बदलाव, अब ऑनलाइन ही दिए जा सकेंगे सुझाव

केंद्र सरकार द्वारा गठित आठवां वेतन आयोग इस बार अपनी कार्यप्रणाली में बदलाव के साथ काम कर रहा है। पहले के वेतन आयोगों के विपरीत, न्यायमूर्ति रंजना देसाई की अध्यक्षता वाला यह आयोग राज्यों का दौरा कर कर्मचारी संगठनों से प्रत्यक्ष मुलाकात नहीं करेगा। समय की सीमाओं को ध्यान में रखते हुए आयोग ने सुझाव और ज्ञापन प्राप्त करने के लिए पूरी प्रक्रिया को डिजिटल माध्यम से करने का फैसला लिया है।

आयोग ने सेवारत कर्मचारियों, पेंशनभोगी संगठनों और अन्य इच्छुक व्यक्तियों से अपने सुझाव ऑनलाइन जमा करने को कहा है। इसके लिए अंतिम तिथि 30 अप्रैल 2026 तय की गई है। सभी सुझाव निर्धारित पोर्टल के माध्यम से ही स्वीकार किए जाएंगे।

ऑनलाइन पोर्टल पर उपलब्ध कराया गया प्रारूप

आयोग ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट 8सीपीसी.गव.इन (8thcpc.gov.in) और माय गवर्नमेंट पोर्टल (innovateindia.mygov.in) पर एक विशेष ऑनलाइन प्रारूप उपलब्ध कराया है। इसी प्रारूप के जरिए कर्मचारी और संगठन अपने सुझाव दर्ज कर सकेंगे।

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आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि केवल पोर्टल पर जमा किए गए सुझावों को ही मान्य माना जाएगा। किसी भी प्रकार की कागजी प्रतियां, ईमेल या पीडीएफ दस्तावेज स्वीकार नहीं किए जाएंगे। हितधारकों से निर्धारित समयसीमा के भीतर ऑनलाइन माध्यम से ही अपनी मांगें प्रस्तुत करने का आग्रह किया गया है।

18 महीने में पेश होगी आयोग की रिपोर्ट

केंद्र सरकार ने 3 नवंबर 2025 को आठवें वेतन आयोग का गठन किया था। आयोग को अपनी विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने और सरकार को सौंपने के लिए लगभग 18 महीने का समय दिया गया है। हालांकि यह भी संभावना जताई जा रही है कि कुछ जरूरी मुद्दों पर आयोग अंतिम रिपोर्ट से पहले अंतरिम रिपोर्ट भी प्रस्तुत कर सकता है।

इन कर्मचारियों को नहीं मिलेगा सीधा लाभ

वेतन आयोग की सिफारिशें मुख्य रूप से केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों पर लागू होती हैं। निजी क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों को इसका सीधा लाभ नहीं मिलता, क्योंकि उनकी सैलरी कंपनियों के आंतरिक नियमों के आधार पर तय होती है।

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इसी तरह संविदा या अस्थायी कर्मचारियों, जो केंद्रीय सिविल सेवा नियमों के अंतर्गत नहीं आते, वे भी इसके दायरे से बाहर रहते हैं। राज्य सरकारों के कर्मचारियों को तभी लाभ मिलता है जब उनकी संबंधित राज्य सरकार वेतन आयोग की सिफारिशों को अपनाने का निर्णय ले। इसके अलावा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और स्वायत्त संस्थानों का अपना अलग वेतन ढांचा होता है, इसलिए उन्हें भी स्वतः लाभ नहीं मिलता।

1.19 करोड़ लोगों पर पड़ेगा प्रभाव

आठवें वेतन आयोग का असर देश के बड़े वर्ग पर पड़ने वाला है। इसके दायरे में करीब 50 लाख केंद्रीय कर्मचारी और लगभग 69 लाख पेंशनभोगी आते हैं। इस तरह कुल मिलाकर करीब 1.19 करोड़ लोगों के वेतन और पेंशन से जुड़े फैसलों पर इसका प्रभाव पड़ सकता है।

फिटमेंट फैक्टर में बदलाव की संभावना

विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार सबसे बड़ा बदलाव फिटमेंट फैक्टर में देखने को मिल सकता है। सातवें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 2.57 गुना रखा गया था, जबकि कर्मचारी संगठनों की ओर से इसे बढ़ाकर 3.68 गुना करने की मांग की जा रही है।

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हर दस साल में बनता है वेतन आयोग

आमतौर पर केंद्र सरकार हर दस साल में एक वेतन आयोग का गठन करती है। इसका उद्देश्य कर्मचारियों के वेतन ढांचे की समीक्षा करना, महंगाई के अनुसार भत्तों में बदलाव करना, पेंशन और सेवानिवृत्ति से जुड़े लाभों का आकलन करना तथा सेवा शर्तों का पुनर्मूल्यांकन करना होता है।