स्वराज्य करुण

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जिनके गीतों से छत्तीसगढ़ को मिली सांस्कृतिक पहचान : स्मृति शेष लक्ष्मण मस्तुरिया

लोककवि लक्ष्मण मस्तुरिया छत्तीसगढ़ की आत्मा की आवाज थे, जिन्होंने अपने गीतों और मधुर स्वरों से माटी, मया और मानवीय संवेदनाओं को जन-जन तक पहुँचाया। आज उनकी पुण्यतिथि पर छत्तीसगढ़ उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन करता है।

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futuredसाहित्य

साहित्य-सृजन से भी साकार हुआ सबका सपना : छत्तीसगढ़ राज्य रजत जयंती 2025 पर विशेष 

छत्तीसगढ़ की साहित्यिक यात्रा में अनेक रचनाकारों ने हिंदी और छत्तीसगढ़ी साहित्य को नई पहचान दी है। यह आलेख राज्य के साहित्यिक विकास, सृजनशीलता और सांस्कृतिक चेतना का समग्र चित्र प्रस्तुत करता है।

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futuredताजा खबरें

छत्तीसगढ़ ने खोया अपना विद्वान इतिहासकार और साहित्यकार — डॉ. रामकुमार बेहार नहीं रहे

छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ साहित्यकार, इतिहासकार और शिक्षाविद डॉ. रामकुमार बेहार का रायपुर में निधन। बस्तर और छत्तीसगढ़ के इतिहास पर 35 से अधिक पुस्तकें लिखीं। साहित्य जगत में शोक।

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futuredछत्तीसगढ

ग्राम बाघमार में होगा 5 से 7 दिसंबर तीन दिवसीय कंगला मांझी महोत्सव, चयनित विभूतियों को किया जाएगा सम्मानित

बालोद जिले के ग्राम बाघमार में 05 से 07 दिसंबर 2025 तक पारंपरिक कंगला मांझी महोत्सव का आयोजन होगा। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ की प्रतिष्ठित विभूतियों को कंगला मांझी, लतीफ घोघी, नारायण चंद्राकर और अन्य सम्मान प्रदान किए जाएंगे।

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ऐतिहासिक पर्वत पर एक गहन अध्ययन : पुस्तक चर्चा

रामगढ़ पर्वत सरगुजा जिले के तहसील और विकासखंड मुख्यालय उदयपुर के बहुत नज़दीक है। पुस्तक में दी गई जानकारी के अनुसार समुद्र तल से इस पर्वत की ऊँचाई 3206 फीट और स्थानीय धरातल से 1300 फीट है। उदयपुर के कुछ पहले जजगा नामक गाँव से यह पहाड़ किसी बैठे हुए हाथी की तरह दिखाई देता है।

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futuredसाहित्य

लिमतरा: जहाँ चार पीढ़ियों ने निभाई भगवान श्रीराम की भूमिका, आज भी जीवंत है रामलीला की परंपरा

दुर्ग जिले के लिमतरा गाँव की रामलीला मंडली आज भी जीवित परंपरा का प्रतीक है। यहाँ चार पीढ़ियों के कलाकारों ने भगवान श्रीराम की भूमिका निभाई और सांस्कृतिक धरोहर को आगे बढ़ाया।

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