सामाजिक समरसता और नवजीवन का त्योहार वासन्ती नव सस्येष्टि पर्व
होली का वास्तविक स्वरूप वैदिक नवान्न यज्ञ, ऋतु परिवर्तन, कृषि संस्कृति और सामाजिक समरसता से जुड़ा है। जानिए होलिका दहन का सांस्कृतिक, वैज्ञानिक और आध्यात्मिक अर्थ।
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Read Moreऋग्वेद के इस नासदीय सूक्त का पहला ही मंत्र हमें उस आदिम जिज्ञासा के सामने खड़ा कर देता है जहाँ मानव पहली बार सृष्टि के रहस्य पर प्रश्न करता है।
Read Moreयह लेख वीर सावरकर के जीवन, संघर्ष, विचार और साहस का मानवीय व प्रेरक चित्रण प्रस्तुत करता है। जानिए क्यों उनका जीवन आज की युवा पीढ़ी के लिए आत्मबल, राष्ट्रप्रेम और आत्मानुशासन की प्रेरणा है।
Read Moreभारतीय संत परंपरा में कुछ ऐसे नाम हैं जिनकी उपस्थिति केवल इतिहास की पंक्तियों में सीमित नहीं रहती, बल्कि लोकमानस की धड़कनों में बस जाती है। संत दादू दयाल उन्हीं दिव्य व्यक्तित्वों में से एक हैं।
Read More23 दिसंबर 1926 को जब वे अस्वस्थ थे, अब्दुल रशीद नामक व्यक्ति ने उनके घर आकर गोली मार दी। यह घटना पूरे देश को झकझोर गई। वे शय्या पर थे, लेकिन उनके चेहरे पर भय नहीं था। उनकी हत्या ने उनके विचारों को समाप्त नहीं किया, बल्कि उन्हें और व्यापक बना दिया।
Read Moreछत्तीसगढ़ विशेषकर बस्तर में पाए जाने वाले छिंद वृक्ष का ऐतिहासिक, पारिस्थितिक और सांस्कृतिक महत्व। जैव विविधता संरक्षण से लेकर छिंद रस और गुड़ के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था सशक्त करने की पहल पर विस्तृत आलेख।
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