हिंदी साहित्य

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प्राचीन छत्तीसगढ़ के रचयिता प्यारेलाल गुप्त की साहित्य साधना

रविशकर वि”वविद्यालय रायपुर से सन् 1973 में प्रकाशित इस ग्रंथ में प्रागैतिहासिक काल से लेकर आधुनिक युग के पूर्व तक का श्रृंखलाबद्ध इतिहास है। इस ग्रंथ में न केवल प्राचीन छत्तीसगढ़ का इतिहास बल्कि सांस्कृतिक परम्पराओं, लोक कथाओं, पुरातत्व और साहित्य का उल्लेख है। इस ग्रंथ को ‘छत्तीसगढ़ का इनसाइक्लोपीडिया‘ माना जा सकता है। उन्होंने छत्तीसगढ़ की पदयात्रा करके इस ग्रंथ के लिए सामग्री जुटायी थी।

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futuredधर्म-अध्यात्म

रामचरितमानस का नैतिक और सामाजिक प्रभाव

तुलसीदास की रचनाओं का भारतीय जनमानस पर व्यापक प्रभाव पड़ा। रामचरितमानस का भारतीय जनमानस पर अत्यधिक गहरा और व्यापक प्रभाव पड़ा है। गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित यह महाकाव्य न केवल धार्मिक ग्रंथ के रूप में पूजनीय है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति, समाज और जीवन दर्शन का एक महत्वपूर्ण स्तंभ भी है।

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