संघ विचारधारा

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हो. वे. शेषाद्रि जी : जीवन, मूल्य और संघ की दायित्व–परंपरा

हो. वे. शेषाद्रि जी के जीवन, संघ के दायित्व-प्रधान संगठन दर्शन, विनम्र नेतृत्व, राष्ट्रचिंतन और उनके वैचारिक योगदान पर आधारित यह प्रेरक आलेख संघ परंपरा की मूल भावना को उजागर करता है।

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डॉ. हेडगेवार और प.पू. गुरुजी : राष्ट्र-निर्माण एवं हिंदू संगठन का वैचारिक आधार

डॉ. केशवराव हेडगेवार और प.पू. गुरुजी गोलवलकर की राष्ट्र-दृष्टि पर आधारित यह आलेख स्वराज्य, सांस्कृतिक राष्ट्रवाद, संगठन, चरित्र-निर्माण और भारत के वैश्विक नैतिक नेतृत्व की अवधारणा को विस्तार से प्रस्तुत करता है।

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परम् पूज्य गुरुजी माधव सदाशिव गोलवलकर: जीवन एवं योगदान

माधव सदाशिव गोलवलकर, जिन्हें “परम पूज्य गुरुजी” के नाम से जाना जाता है, का जन्म 19 फ़रवरी 1906 को महाराष्ट्र के रामटेक में हुआ। उनके पिता सदाशिवराव ‘भाऊ जी’ शिक्षक थे, और माता लक्ष्मीबाई ‘ताई’ धार्मिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं की वाहक थीं। बचपन से ही असाधारण मेधा के धनी माधव जी की शिक्षा दो वर्ष की आयु से ही प्रारंभ हो गई थी।

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