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किसने कहा था? मनकही

किसी भी परिवार, समाज और राष्ट्र का कल्याण कर्मण्य मनुष्यों के द्वारा ही हो सकता है। इनके कार्य ही आने वाली पीढ़ियों के लिए आदर्श बन कर्मवीर बनने का आदर्श स्थापित करते हैं। अतः प्रत्येक इंसान को कर्मशील रहना चाहिए। महाभारत में श्री कृष्ण ने कहा है ‘कर्मण्येवाधिकारस्ते।’

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मानव जीवन यात्रा में भाग्य और कर्म की भूमिका : मनकही

भाग्य और कर्म  के विषय सदैव यही कहा जाता है कि भाग्य के लेख को मिटाया नही जा सकता। जो

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सकारात्मकता ही जीवन का मूल मंत्र : मनकही

भौतिक सुख-सुविधाएं मनुष्य को तभी ख़ुशी देती हैं जब तन-मन स्वस्थ्य और जीवन सुरक्षित हो, परन्तु परिस्थितियां प्रतिकूल और प्राण

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स्वयं का पुरजोर उद्यम है सफ़लता

जीवन में सफलता निज कार्यों पर आधारित होती है। सही समय पर किया गया उचित प्रयास सफलता की संभावना को

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