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लद्दाख कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की एनएसए के तहत हिरासत खत्म, केंद्र सरकार ने लिया फैसला

लद्दाख में जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच केंद्र सरकार ने प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत की गई हिरासत को समाप्त करने का निर्णय लिया है। करीब छह महीने पहले उनकी गिरफ्तारी हुई थी, जिसके बाद यह मामला लगातार चर्चा में बना हुआ था।

गृह मंत्रालय के अनुसार, सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से सितंबर 2025 में वांगचुक को एनएसए के तहत हिरासत में लिया गया था। उन पर आरोप था कि 24 सितंबर को लद्दाख में हुए हिंसक प्रदर्शनों को भड़काने में उनकी भूमिका रही, जिसमें पुलिस फायरिंग के दौरान चार लोगों की मौत हो गई थी।

सरकार ने बताया कि लेह में उस समय कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए जिला मजिस्ट्रेट के आदेश पर 26 सितंबर को वांगचुक को एनएसए के तहत निरुद्ध किया गया था। अब तक वह इस हिरासत की लगभग आधी अवधि पूरी कर चुके थे।

यह निर्णय ऐसे समय लिया गया है जब सुप्रीम कोर्ट में वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. अंगमो द्वारा उनकी हिरासत को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई चल रही है। न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति पी. बी. वराले की पीठ इस मामले की अगली सुनवाई 17 मार्च को करने वाली है।

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गृह मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने कहा कि केंद्र सरकार लद्दाख के विभिन्न सामाजिक संगठनों, समुदायों और स्थानीय नेताओं से लगातार संवाद कर रही है, ताकि क्षेत्र की समस्याओं और लोगों की अपेक्षाओं का समाधान निकाला जा सके। हालांकि लगातार बंद और प्रदर्शनों के कारण आम जनजीवन और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा था।

सरकार ने अपने बयान में यह भी कहा कि लद्दाख में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए सभी पक्षों के साथ सार्थक संवाद की प्रक्रिया जारी रहेगी। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए एनएसए के तहत सोनम वांगचुक की हिरासत को तत्काल प्रभाव से समाप्त करने का फैसला लिया गया है।

केंद्र सरकार ने भरोसा जताया है कि लद्दाख से जुड़े मुद्दों का समाधान उच्चस्तरीय समिति और अन्य संवाद मंचों के माध्यम से बातचीत के जरिए निकाला जाएगा। साथ ही क्षेत्र के लोगों की सुरक्षा और अधिकारों की रक्षा के लिए सरकार प्रतिबद्ध है।

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