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‘णमोकार महामंत्र’ विश्वशांति और आत्मिक चेतना का सार्वभौमिक संदेश : दत्तात्रेय होसबाले

मुंबई, 26 मई 2026। जहांगीर आर्ट गैलरी में कलाकार जैन कमल की विशेष प्रदर्शनी ‘विश्व शांति के लिए णमोकार महामंत्र’ का उद्घाटन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि ‘णमोकार मंत्र’ केवल जैन परंपरा का मंत्र नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता के लिए शांति, सद्भाव और आध्यात्मिक चेतना का सार्वभौमिक संदेश है। यह मंत्र मनुष्य को आंतरिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और आत्मचिंतन की दिशा प्रदान करता है।

सरकार्यवाह जी ने कलाकार जैन कमल की कलाकृतियों की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने णमोकार महामंत्र को विविध लिपियों, रंगों और कलात्मक रूपों में प्रस्तुत कर केवल चित्रों का प्रदर्शन नहीं किया, बल्कि आध्यात्मिक चेतना को दृश्य रूप में साकार करने का प्रयास किया है। उन्होंने कहा कि कला केवल देखने की वस्तु नहीं होती, बल्कि आत्मा को भीतर तक स्पर्श करने वाली साधना होती है। यह प्रदर्शनी दर्शकों को बाहरी संसार से अंतर्मन की यात्रा की अनुभूति कराती है।

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उन्होंने भारतीय संस्कृति में अक्षरों और मंत्रों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारतीय परंपरा में मंत्र केवल शब्द या ध्वनि नहीं, बल्कि शाश्वत चेतना और दिव्य ऊर्जा के प्रतीक माने गए हैं। मंत्र किसी व्यक्ति की रचना नहीं होते, बल्कि ऋषियों की दिव्य अनुभूति से प्रकट होते हैं। इसी कारण उनका महत्व कालातीत और सार्वभौमिक है। “अक्षर” शब्द का अर्थ ही है जो “क्षर” अर्थात नष्ट न हो। मंत्र अक्षरों से निर्मित होते हैं, इसलिए वे भी अविनाशी और शाश्वत माने जाते हैं।

दत्तात्रेय होसबाले जी ने कहा कि भारतीय ऋषि केवल वर्तमान के चिंतक नहीं थे, बल्कि भूत, वर्तमान और भविष्य का समग्र दर्शन करने वाले “दृष्टा” थे। उन्हीं की अनुभूति से मंत्र प्रकट हुए और समाज को आध्यात्मिक दिशा मिली। उन्होंने कहा कि णमोकार महामंत्र किसी व्यक्ति विशेष की उपासना नहीं करता, बल्कि पंचपरमेष्ठियों के गुणों को नमन करता है। इसमें अरिहंत, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय और साधु के आध्यात्मिक आदर्शों का स्मरण किया जाता है। यह मंत्र मनुष्य को अपने भीतर के षडरिपुओं — काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद और मत्सर — पर नियंत्रण पाने की प्रेरणा देता है।

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अपने संबोधन में उन्होंने आपातकाल और जयप्रकाश नारायण आंदोलन के दौरान बेंगलुरु जेल की एक घटना का उल्लेख करते हुए बताया कि उस समय विभिन्न धर्म और संप्रदायों के बंदी नियमित रूप से णमोकार मंत्र का जाप करते थे। इससे उनके भीतर आत्मबल, एकता और सद्भाव की भावना विकसित हुई। उन्होंने कहा कि णमोकार मंत्र व्यक्ति को आत्मशुद्धि, आत्मचिंतन और योगस्वरूप बनने की प्रेरणा देता है।

कार्यक्रम में जैन मुनि नयपद्मसागर सूरीश्वर जी महाराज ने कहा कि णमोकार महामंत्र आत्मिक शुद्धि और विश्वकल्याण का माध्यम है। सामूहिक साधना और आध्यात्मिक शक्ति मिलकर मानवता के लिए सकारात्मक परिवर्तन ला सकती है। वहीं कलाकार जैन कमल ने कहा कि प्रदर्शनी की प्रत्येक कलाकृति दर्शकों को एक नया आध्यात्मिक और सौंदर्यपूर्ण अनुभव प्रदान करने का प्रयास है।

समारोह में उपस्थित कला प्रेमियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और आध्यात्मिक जगत से जुड़े लोगों ने प्रदर्शनी की सराहना करते हुए इसे भारतीय आध्यात्मिक परंपरा और आधुनिक कला के सुंदर समन्वय का उदाहरण बताया।

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