राजनांदगांव में समरस संस्थान साहित्य सृजन की प्रांतीय इकाई का शपथ ग्रहण समारोह सम्पन्न
राजनांदगांव, 26 मई 2026। प्रदेश की साहित्यिक एवं सांस्कृतिक नगरी राजनांदगांव में समरस संस्थान साहित्य सृजन भारत की नवगठित छत्तीसगढ़ प्रांतीय इकाई के पदाधिकारियों का शपथ ग्रहण समारोह गरिमामय वातावरण में सम्पन्न हुआ। रविवार 24 मई को आयोजित इस समारोह में छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में साहित्यकार, पत्रकार, समाजसेवी और प्रबुद्ध नागरिक शामिल हुए।
समारोह के मुख्य अतिथि राजनांदगांव नगर निगम के महापौर एवं पूर्व सांसद मधुसूदन यादव थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. मुकेश कुमार व्यास ‘स्नेहिल’ ने की, जो गांधी नगर (गुजरात) से विशेष रूप से समारोह में शामिल होने पहुंचे थे।
समारोह में पद्मश्री सम्मानित समाजसेवी श्रीमती फुलबासन यादव तथा डॉ. पुखराज बाफना अति विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। दोनों ही विभूतियाँ राजनांदगांव की पहचान मानी जाती हैं।
कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा पूजन-अर्चन एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। स्वागत भाषण प्रोफेसर डॉ. चन्द्रशेखर शर्मा ने दिया।
मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए मधुसूदन यादव ने कहा कि सच्चा साहित्यकार अपनी रचनाओं के माध्यम से समाज को सही दिशा प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि साहित्य सृजन वास्तव में माँ सरस्वती की साधना और उपासना है। श्रेष्ठ साहित्य जीवन के यथार्थ को संवेदनशीलता और गंभीरता के साथ अभिव्यक्त करता है। उन्होंने नवगठित संस्थान के पदाधिकारियों को बधाई और शुभकामनाएँ भी दीं।
महापौर मधुसूदन यादव ने समारोह में महत्वपूर्ण घोषणाएँ करते हुए राजनांदगांव के सृजन संवाद भवन में एयर कंडीशनर लगवाने तथा अप्रैल 2028 में आयोजित होने वाले समरस संस्थान साहित्य सृजन भारत के राष्ट्रीय अधिवेशन हेतु ऑडिटोरियम नि:शुल्क उपलब्ध कराने की घोषणा की। इसके अतिरिक्त उन्होंने सृजन संवाद भवन परिसर के समीप खोदे गए नलकूप में फँसे पाइप को निकलवाने और वहाँ सबमर्सिबल पम्प लगवाने का भी आश्वासन दिया।
समारोह की अध्यक्षता करते हुए डॉ. मुकेश कुमार व्यास ‘स्नेहिल’ ने छत्तीसगढ़ प्रांतीय इकाई के पदाधिकारियों को शपथ दिलाई। इसके साथ ही उन्होंने राजनांदगांव, बालोद, दुर्ग, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी तथा खैरागढ़-छुईखदान-गंडई इकाइयों के मनोनीत पदाधिकारियों को भी शपथ ग्रहण करवाया।
अपने उद्बोधन में डॉ. व्यास ने समरस संस्थान साहित्य सृजन भारत के उद्देश्यों और गतिविधियों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि संस्थान भारत के 19 राज्यों सहित दुनिया के चार देशों में सक्रिय रूप से संचालित हो रहा है तथा इसके 42 हजार से अधिक सदस्य हैं। उन्होंने कहा कि संस्थान साहित्यिक और सांस्कृतिक गतिविधियों के साथ-साथ समाज सेवा के क्षेत्र में भी निरंतर कार्य कर रहा है। साथ ही हिन्दी को राष्ट्रभाषा का दर्जा दिलाने के लिए भी प्रयासरत है।
समारोह को श्रीमती फुलबासन यादव और डॉ. पुखराज बाफना ने भी संबोधित किया तथा साहित्य और समाज सेवा के महत्व पर अपने विचार रखे।
कार्यक्रम का संचालन साहित्यकार, छत्तीसगढ़ी फिल्म अभिनेता, समरस संस्थान साहित्य सृजन भारत के राष्ट्रीय संगठन मंत्री एवं छत्तीसगढ़ प्रांत प्रभारी डॉ. गजेन्द्र हरिहरनो ‘दीप’ ने प्रभावशाली ढंग से किया।
आभार प्रदर्शन प्रांतीय उपाध्यक्ष डॉ. इकबाल खान ‘तन्हा’ ने किया।
समारोह में कवियों ने विभिन्न विषयों पर काव्य पाठ कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया। आयोजन के दौरान संस्थान की ई-पत्रिका, रक्तदान विषयक रचनाओं के संकलन, गायत्री साहू ‘शिवांगी’ के समरस गीत के यूट्यूब संस्करण तथा प्रीतम कोठारी ‘समीर’ की रचना का विमोचन भी किया गया।
कार्यक्रम में ‘छत्तीसगढ़ आस-पास’ के संपादक प्रदीप भट्टाचार्य, वरिष्ठ पत्रकार एवं साहित्यकार वीरेंद्र बहादुर सिंह, सूर्यकांत मिश्रा, आत्माराम कोशा, प्रभात तिवारी, हरिप्रकाश गुप्ता ‘वत्स’, पद्मलोचन शर्मा ‘मुंहफट’, संस्था के प्रांतीय कार्यालय मंत्री ओमप्रकाश साहू ‘अंकुर’, प्रांतीय सचिव लखनलाल साहू ‘लहर’, जिलाध्यक्ष अमृतदास साहू, जिला संगठन मंत्री सचिन निषाद, जिला संरक्षक महेन्द्र कुमार बघेल ‘मधु’, राजकुमार चौधरी ‘रौना’, जिला कोषाध्यक्ष कुलेश्वरदास साहू, राजकुमार मस्खरे, अशोक आकाश, हर्षा देवांगन, सुजाता साहू, आनंदराम सार्वा, एस.एल. गंधर्व, जितेन्द्र पटेल, नूतन साहू, श्रवण कुमार साहू, धर्मेंद्र कुमार श्रवण, जिला महामंत्री ग्वालाप्रसाद यादव ‘नटखट’, रामकुमार चंद्रवंशी, जिला संगठन मंत्री प्रीतम कोठारी ‘समीर’, जिला सचिव रोशनलाल साहू, पूनाराम यादव, पवन यादव ‘पहुना’, केशवराम साहू, गजपति राम साहू, सोनिया नायडू, नंदकिशोर साव ‘नीरव’, तोषण कुमार चुरेन्द्र, रोहणी पटेल, अलखराम यादव, दूजराम साहू, गुमान सिंह साहू, धर्मेंद्र जंघेल, महदीप जंघेल, मदन मंडावी, जसवंत मंडावी, शिवप्रसाद साहू, बलराम सिन्हा सहित अनेक साहित्यकार, पत्रकार और गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
समारोह साहित्य, संस्कृति, समाज सेवा और संगठनात्मक ऊर्जा का प्रभावी संगम बनकर उभरा तथा उपस्थित साहित्यकारों में नई प्रेरणा का संचार करता दिखाई दिया।
प्रेषक- स्वराज्य करुण

