अरुणाचल के मुख्यमंत्री पेमाखांडू पर ठेका आवंटन में पक्षपात के आरोप, सुप्रीम कोर्ट ने CBI जांच के दिए आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमाखांडू के खिलाफ लगे आरोपों की जांच करने का निर्देश दिया है। आरोप है कि पिछले एक दशक में सरकारी ठेकों के आवंटन में उन्होंने अपने परिवार से जुड़ी कंपनियों को अनुचित लाभ पहुंचाया।
अदालत ने CBI को चार महीने के भीतर जांच की स्थिति रिपोर्ट पेश करने को कहा है। साथ ही राज्य के मुख्य सचिव को एक नोडल अधिकारी नियुक्त करने के निर्देश दिए गए हैं, जो जांच एजेंसी के साथ समन्वय कर आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराएगा। कोर्ट ने राज्य सरकार को स्पष्ट रूप से निर्देश दिया कि जांच से संबंधित किसी भी साक्ष्य को नष्ट न किया जाए।
यह मामला एक जनहित याचिका (PIL) के जरिए अदालत के समक्ष आया, जिसमें आरोप लगाया गया कि मुख्यमंत्री के परिवार से जुड़ी फर्मों को हजारों करोड़ रुपये के ठेके दिए गए। याचिका में विशेष रूप से तवांग जिले में विकास कार्यों के ठेकों के आवंटन पर सवाल उठाए गए हैं।
सुनवाई के दौरान अदालत ने टिप्पणी की कि एक ही परिवार से जुड़ी संस्थाओं को बड़ी संख्या में ठेके मिलना “असाधारण संयोग” प्रतीत होता है। राज्य सरकार की ओर से यह दलील दी गई कि आरोप केवल तवांग जिले तक सीमित हैं, लेकिन अदालत ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि मामला पूरे राज्य से जुड़ा हुआ है।
राज्य सरकार द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, तवांग जिले में पिछले 10 वर्षों में दिए गए लगभग 300 ठेकों में से 154 ठेके कथित तौर पर मुख्यमंत्री के परिवार से जुड़े संस्थानों को मिले। इस पर अदालत ने मुख्यमंत्री पक्ष को निर्देश दिया कि वे पूरे राज्य में परिवार से संबंधित कंपनियों को दिए गए ठेकों का विस्तृत हलफनामा दाखिल करें।
याचिकाकर्ताओं ने यह भी बताया कि पहले की कार्यवाही में नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ने निविदा प्रक्रिया में वित्तीय नियमों के उल्लंघन की ओर इशारा किया था। इसमें पारदर्शिता, निष्पक्षता और हितों के टकराव से बचने जैसे प्रावधानों का पालन न होने की बात सामने आई थी।
राज्य सरकार ने अपनी ओर से सफाई देते हुए कहा कि 2015 में बनाए गए एक कानून के तहत 50 लाख रुपये तक के कार्यों के लिए “वर्क ऑर्डर” के माध्यम से ठेके दिए जा सकते हैं, जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर मिलते हैं। सरकार का यह भी कहना है कि यह व्यवस्था पहले से प्रचलित रही है।
अब इस मामले में CBI जांच के बाद ही आरोपों की सच्चाई सामने आ पाएगी, जिस पर देशभर की नजरें टिकी हुई हैं।

