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डॉ. माणिक विश्वकर्मा ‘नवरंग’ बने हिंदी सलाहकार समिति के राष्ट्रीय सदस्य, छत्तीसगढ़ को मिला गौरव

छत्तीसगढ़ के जाने-माने साहित्यकार, समीक्षक और नवछंद विधान ‘हिंदकी’ के प्रवर्तक डॉ. माणिक विश्वकर्मा ‘नवरंग’ को केंद्र सरकार के कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय की हिंदी सलाहकार समिति में राष्ट्रीय सदस्य के रूप में नामित किया गया है। यह नियुक्ति गृह मंत्रालय के राजभाषा विभाग द्वारा केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय की स्वीकृति के पश्चात की गई है।

राजभाषा विभाग की संयुक्त सचिव मीनाक्षी जौली द्वारा जारी आदेश के अनुसार, यह नियुक्ति 8 अगस्त 2025 को प्रभाव में आई है। इस समिति में देशभर से केवल तीन गैर-सरकारी सदस्यों को मनोनीत किया गया है, जिनमें डॉ. माणिक विश्वकर्मा के अलावा हरियाणा से नेहा धवन और चेन्नई से श्रीश्री कांथा कन्नन शामिल हैं।

हिंदी और तकनीकी शिक्षा के समावेश पर रहेगा जोर

अपनी नियुक्ति पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए डॉ. विश्वकर्मा ने कहा कि वे मंत्रालय के साथ मिलकर तकनीकी शिक्षा और कौशल विकास में हिंदी भाषा के उपयोग को प्रोत्साहित करने का प्रयास करेंगे। उन्होंने इस ज़िम्मेदारी को पूरी निष्ठा, ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ निभाने की प्रतिबद्धता भी जताई।

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साहित्य, भाषा और समाज के लिए समर्पित जीवन

एनटीपीसी कोरबा में उपमहाप्रबंधक पद से सेवानिवृत्त डॉ. माणिक विश्वकर्मा ‘नवरंग’ ने विज्ञान में स्नातकोत्तर शिक्षा प्राप्त करने के बाद भी अपना संपूर्ण जीवन हिंदी भाषा और साहित्य को समर्पित कर दिया। वर्ष 1971 से सक्रिय साहित्यिक यात्रा में वे 15 से अधिक पुस्तकों के लेखक हैं, जिनमें कविता संग्रह, आलोचना ग्रंथ और संपादित कृतियाँ शामिल हैं। उनकी पाँच और रचनाएँ प्रकाशनाधीन हैं।

उनकी लेखनी में भाषा की सहजता, विषय की गहराई और नवाचार का अद्भुत संतुलन देखने को मिलता है। वे मानव मूल्यों के पक्षधर कवि माने जाते हैं, जिनकी रचनाएँ सामाजिक सरोकारों और पर्यावरण जैसे विषयों पर केंद्रित रहती हैं। उन्होंने तीन दशकों तक पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय योगदान दिया है, और हजारों पौधों के रोपण अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाई है।

नए रचनाकारों को दे रहे हैं मंच

डॉ. विश्वकर्मा ‘नवरंग’ संकेत साहित्य समिति (स्थापना: 1981) के संस्थापक और प्रांतीय अध्यक्ष हैं, जिसके माध्यम से वे पिछले 44 वर्षों से उभरते रचनाकारों को प्रोत्साहित कर रहे हैं। वे अनेक साहित्यिक, सांस्कृतिक और सामाजिक संस्थाओं से जुड़े हैं और निरंतर मार्गदर्शन प्रदान कर रहे हैं।

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जिन संस्थाओं से जुड़े हैं:

  • संस्थापक एवं प्रांतीय अध्यक्ष: संकेत साहित्य समिति, छत्तीसगढ़

  • प्रांतीय संरक्षक: मय-मनु विश्वकर्मा संघ, छत्तीसगढ़

  • संरक्षक: पं. मुकुटधर पांडे साहित्य भवन समिति, कोरबा

  • प्रांतीय कार्याध्यक्ष: संस्कार भारती, छत्तीसगढ़

  • मार्गदर्शक: हिंदी साहित्य भारती, छत्तीसगढ़

  • संरक्षक: राष्ट्रीय कवि संगम, रायपुर

साहित्य जगत से मिल रही हैं शुभकामनाएं

डॉ. माणिक विश्वकर्मा की इस प्रतिष्ठित नियुक्ति पर साहित्यिक जगत ने हर्ष जताया है।
डॉ. चितरंजन कर, डॉ. देवधर महंत, शशांक शर्मा, रमेश शर्मा, श्याम नारायण श्रीवास्तव, सुशीला साहू, डॉ. वंदना जायसवाल, राजीव नयन शर्मा सहित अनेक साहित्यकारों और सांस्कृतिक कर्मियों ने उन्हें बधाई दी है।

छत्तीसगढ़ का गौरव

डॉ. विश्वकर्मा ने इस उपलब्धि को छत्तीसगढ़ राज्य और अपने परिवार के लिए सम्मानजनक उपलब्धि बताया और इसके लिए राज्य व केंद्र सरकार तथा भाजपा नेतृत्व का आभार व्यक्त किया। उन्होंने यह भी दोहराया कि वे शिक्षा और प्रशासनिक कार्यों में हिंदी के अधिकाधिक उपयोग को लेकर सतत प्रयासरत रहेंगे।