\

जानिए आज के दिन बुद्ध क्यों मुस्कुराए थे

आज से बीस वर्ष पहले बुद्ध मुस्कुराए थे, इस दिन मैं भी मुस्काया था। पर इस मुस्कान से सारा विश्व थर्राया था। बड़ी कातिल एवं मारक मुस्कान थी, दिन था बुद्ध पूर्णिमा का।
इस एक मुस्कान से पूरा विश्व चौंक गया और भारत का रुतबा तथा गौरव बढ़ा। हर राष्ट्र प्रेमी का गर्व से भाल उन्नत हुआ था। पूरे विश्व के परमाणु संयंत्रों और सैन्य गतिविधियों पर सैटेलाइट से निगरानी करने वाला अमेरिका उस समय बौखला गया था।
पोखरण फील्ड फायरिंग रेंज में खेतोलाई गांव के पास 11 व 13 मई को भारत की ओर से किए गए परमाणु परीक्षण की अमेरिका जैसे शक्तिशाली देश को भनक तक नहीं लगी। इस बात का मलाल उसे आज भी है।
हालांकि, आज हालात बदल गए हैं। 1974 के बाद 11 मई 1998 को पोखरण में भारत ने परमाणु परीक्षण किया तो इजरायल को छोड़कर विश्व के सारे देश भारत के खिलाफ उठ खड़े हुए। अमेरिका सहित कई देशों ने भारत पर आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए।
भारत ने 1998 में पोखरण में सफलतापूर्वक पांच परमाणु परीक्षण किए थे। इसके बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने ‘जय जवान, जय किसान’ और ‘जय विज्ञान’ का नया नारा देश को दिया था।
राजस्थान के जैसलमेर जिले में स्थित थार रेगिस्तान अपनी एक अलग पहचान रखता है। 18 मई, 1974 को, पोखरण में भारत ने पहला परमाणु परीक्षण किया था। इस ऑपरेशन का नाम ‘बुद्ध स्माइलिंग’ था।
कहा जाता है कि उस समय पोखरण में परमाणु विस्फोट से पहले पूरे विश्व के जासूसों का ध्यान यहां से से हटाने के लिए भारत ने अपनी सैन्य गतिविधियों अन्य सैन्य क्षेत्रों में अचानक बढ़ा दी थी।
अमेरिका सहित पूरे देश के सैटेलाइटों का ध्यान उन क्षेत्रों की जासूसी पर लग गया और इधर भारत ने परमाणु परीक्षण कर दिया। इसके बाद तो दुनिया भर के देशों ने जो प्रतिक्रिया दी वह देखने लायक थी। पोखरण में एक के बाद एक पांच परमाणु परीक्षण किए गए थे।
1998 में आम चुनाव के बाद अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री बने। उन्होंने अपने चुनाव अभियान में भारत को बड़ी परमाणु शक्ति बनाने का नारा दिया था।
सत्ता में आने के दो महीने के अंदर ही उन्होंने अपने इस वादे को पूरा करने के लिए परमाणु वैज्ञानिकों से परमाणु परीक्षण की तैयारी करने को कहा। इससे पहले 1995 में भारत की परमाणु तैयारियों की भनक अमेरिका को लग गई थी। इस बार अभियान की तैयारियों को पूरी तरह गोपनीय रखा गया।
इस अभियान की जानकारी प्रधानमंत्री के अलावा कुछ वैज्ञानिकों और सैन्य अधिकारियों को ही थी। पूरा अभियान एपीजे अब्दुल कलाम,  राजगोपाल चिदंबरम की देखरेख में चल रहा था।
डॉ. अनिल काकोड़कर समेत आठ वैज्ञानिकों की टीम सहयोग कर रही थी। अभियान की जमीनी तैयारियों में 58 इंजीनियर्स रेजीमेंट ने सहयोग किया। इस दौरान यह सभी लोग सेना के अधिकारियों के ड्रेस में थे।
परीक्षण सफल होने के बाद फोन कर तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को बुद्ध मुस्कराए के रूप में सफलता का संकेत दिया गया। पूरा कार्यक्रम इतना गुपचुप तरीके से हुआ कि सभी अत्याधुनिक सैटेलाइट तकनीकें धरी रह गई और भारत को बहुत बड़ी कामयाबी मिली।
आज पुनः उस गौरव के दिन का स्मरण कर रहा हूँ जब अटल जी जैसे इच्छाशक्ति के धनी व्यक्ति के संकल्प से परमाणु परीक्षण संभव हो पाया।
एक बुद्ध ने अपने संदेशों से विश्व को शांति का मार्ग दिखाया और अशोक जैसे बलशाली शासक के हृदय में करुणा उपजाई, दूसरे अटल जी ने परमाणु परीक्षण कर दुनिया में शांति का संदेश दिया, जिससे विश्व की महाशक्तियां भी भारत की बात सुनने लगी और उस पर गौर करने लगी।
आज का दिन राष्ट्र के लिए गौरव एवं अभिमान का दिन है। कहा गया है,  क्षमा उस भुजंग को शोभती जिसमें गरल भरा हो।