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108 नम्बर बना प्राण रक्षक

रायपुर, 13 जुलाई 2014/ सड़क हादसों और अन्य दुर्घटनाओं में घायल मरीजों तथा अचानक हृदयाघात जैसी बीमारियों से पीड़ित लोगों तत्काल अस्पताल पहुंचाने के लिए छत्तीसगढ़ के सभी जिलों में 240 संजीवनी एक्सप्रेस वाहन चौबीसों घण्टे तैनात किए गए हैं। इन वाहनों में विगत साढ़े तीन वर्ष में लगभग सात लाख 40 हजार मरीजों को तत्काल समय पर अस्पताल पहंुचाकर उन्हें त्वरित चिकित्सा सहायता दिलाई गई है। इनमें लगभग सात लाख 24 हजार मेडिकल इमरजेंसी के प्रकरण भी शामिल हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने राज्य में लोगों की जीवन रक्षा में लगे संजीवनी एक्सप्रेस वाहनों की भूमिका की सराहना करते हुए कहा है कि ये वाहन वास्तव में अपने नाम के अनुरूप मरीजों को नया जीवन देने वाले देवदूत साबित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि गंभीर मरीजों को अगर समय पर अस्पताल पहुंचा दिया जाए तो बड़ी संख्या में उनके प्राणों की रक्षा हो सकती है। इस दृष्टि से देखा जाए तो संजीवनी एक्सप्रेस योजना वास्तव में पीड़ित मानवता की सेवा की एक महत्वपूर्ण योजना है। निःशुल्क टेलीफोन नम्बर 108 पर किसी जरूरतमंद मरीज या उसके निकटतम किसी व्यक्ति का फोन आते ही जीवन रक्षक उपकरणों के साथ ’संजीवनी’ उसके घर या घटना स्थल पर पहुंच जाती है। मुख्यमंत्री ने सबसे पहले 25 जनवरी 2011 को रायपुर और बस्तर जिले के लिए इस योजना का शुभारंभ किया था। उनकी विशेष पहल पर राज्य में संजीवनी एक्सप्रेस वाहनों की संख्या लगातार बढ़ती गई। वर्ष 2012 में इन वाहनों की संख्या 180 थी, जो आज बढ़कर 240 तक पहुंच गई है।
राज्य शासन द्वारा जनता के लिए यह आपात कालीन चिकित्सा सेवा जी.व्ही. कृष्णा रेड्डी इमरजेंसी मैनेजमेंट एण्ड रिसर्च इंस्टीट्यूट के सहयोग से संचालित की जा रही है।  मुख्यमंत्री को राजधानी रायपुर स्थित इस संस्था के राज्य मुख्यालय के ऑपरेशनल प्रमुख श्री सुरेश कामले ने संजीवनी एक्सप्रेस वाहनों द्वारा अब तक किए गए कार्यों का ब्यौरा दिया है। श्री कामले के प्रतिवेदन के अनुसार विगत माह जून 2014 तक संजीवनी एक्सप्रेस वाहनों ने सात लाख 39 हजार 822 मरीजों को अस्पतालों तक पहुंचाया है। मेडिकल इमरजेंसी के सात लाख 24 हजार, सड़क दुर्घटनाओं के 87 हजार 102, पुलिस इमरजेंसी के दस हजार 728, अग्नि दुर्घटनाओं के पांच हजार 541, हृदय रोग के 14 हजार 694 मरीज भी इनमें शामिल हैं। इसके अलावा दो लाख 20 हजार 355 गर्भवती महिलाओं और श्वसन से संबंधित समस्या वाले 14 हजार 525  मरीजों को भी इन वाहनों से अस्पताल पहुंचाया गया है। संजीवनी एक्सप्रेस योजना के तहत निःशुल्क टेलीफोन नंबर 108 पर मिलने वाली आपातकालीन सूचनाओं का तत्काल संज्ञान लेकर संकटग्रस्त मरीज तक एम्बुलेंस पहुंचाया जाता है और उसे निकटवर्ती अस्पतालों में दाखिल कराया जाता है। श्री कामले ने बताया कि सूचना मिलते ही संजीवनी एक्सप्रेस वाहन शहरी क्षेत्रों में औसतन 15 मिनट के भीतर और ग्रामीण क्षेत्रों में औसतन 27 मिनट के भीतर संबंधित मरीेजों तक पहुंच जाते हैं। सड़क दुर्घटना, गंभीर चोट, हृदय रोग, श्वांस संबंधी, गंभीर कष्ट, सर्पदंश, जानवरों के आक्रमण, मिर्गी, प्रसव, मधुमेह, लू लगने, आग से जलने, गंभीर बुखार और संक्रमण जैसी मेडिकल इमरजेंसी में संजीवनी एक्सप्रेस मरीजों और प्रभावितों के लिए मददगार आती है। विगत तीन वर्ष में करीब 27 हजार ऐसे गंभीर मरीजों को भी संजीवनी वाहनों के जरिए नया जीवन मिला है, जिन्हें अगर समय पर अस्पताल नहीं पहुंचाया जाता तो उनकी मृत्यु हो सकती थी।
आपातकालीन पुलिस सेवा के अंतर्गत मारपीट, डकैती, लूटपाट जैसी हिंसक घटनाओं में घायल लोगों को भी संजीवनी एक्सप्रेस वाहनों में अस्पतालों तक पहुंचाया जाता है।  अग्नि दुर्घटनाओं तथा उद्योगों में आग लगने की घटनाओं में झुलसे लोगों को तत्काल अस्पताल पहुंचाने में भी संजीवनी की अहम भूमिका होती है। टोल फ्री नम्बर 108 पर फोन करके संजीवनी एम्बुलेंस को घटनास्थल अथवा मरीज के घर तक बुलाया जा सकता है। यह टोल फ्री नम्बर चौबीसों घंटे चालू रहता है।

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