मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने समीक्षा बैठक में दिए कई निर्देश

रायपुर, 03 जून 2016/ मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने महानदी पर बने बैराजों के भू-विस्थापितों की आर्थिक बेहतरी के लिए अधिकारियों को विशेष कार्ययोजना जल्द तैयार करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने आज शाम यहां मंत्रालय (महानदी भवन) में आयोजित बैठक में अधिकारियों को इस आशय के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने बैठक में राज्य में भू-जल संरक्षण और संवर्धन के लिए चल रहे कार्यों की भी विस्तार से समीक्षा की।
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उन्होंने आगामी खरीफ मौसम को ध्यान में रखते हुए वर्ष 2016 के खरीफ कार्यक्रम के तहत कृषि आदान व्यवस्था के बारे में भी अधिकारियों से जानकारी ली। बैठक में बताया गया कि इस वर्ष खरीफ फसलों की खेती के लिए किसानों को सहकारी समितियों के माध्यम से दो हजार 800 करोड़ रूपए का ब्याज मुक्त अल्पकालीन कृषि ऋण देने का लक्ष्य है। यह राशि पिछले वर्ष की तुलना में 364 करोड़ रूपए अधिक होगी। कृषि ऋणों का वितरण 60 प्रतिशत राशि नगद और 40 प्रतिशत राशि वस्तु के रूप में दी जाएगी।
मुख्यमंत्री ने बैराजों की समीक्षा के दौरान कहा कि जांजगीर-चांपा, बलौदाबाजार और रायगढ़ जिले में महानदी पर बैराज बनाए गए हैं। ये बैराज शिवरीनारायण, वसंतपुर, निरौनी और साराडीह में स्थित हैं। मुख्यमंत्री ने बैठक में इन बैराजों के भू-विस्थापितों को बैराजों में मछली पालन जैसे रोजगारमूलक व्यवसायों से जोड़ने की जरूरत पर बल दिया। मुख्यमंत्री ने बैठक में अधिकारियों को इसके लिए भू-विस्थापितों की सहकारी समिति बनाने के निर्देश दिए। डॉ. सिंह ने कहा कि भू-विस्थापितों को सिंचाई सुविधा का लाभ देने के लिए सोलर पम्प भी दिए जाएं। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन बैराजों के पानी का उपयोग उद्योगों के साथ-साथ संबंधित क्षेत्रों में सिंचाई और पेयजल के लिए भी किया जाए, ताकि वहां के किसानों और आम नागरिकों को इनका समुचित लाभ मिल सके। उन्होंने यह भी कहा कि शिवरीनारायण में निर्मित बैराज को पर्यटन की दृष्टि से और भी अधिक बेहतर ढंग से विकसित किया जाए।
डॉ. सिंह ने बैठक में पिछले वर्ष के सूखा प्रभावित किसानों को प्रदेश के सहकारी बैंकों के माध्यम से राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना की राशि के वितरण कार्य की भी समीक्षा की। छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी बैंक (अपेक्स बैंक) के अधिकारियों ने बैठक में बताया कि बीमा कंपनी द्वारा अब तक पांच लाख 68 हजार 275 किसानों के लिए 525 करोड़ 17 लाख के बीमा दावा राशि का भुगतान सहकारी बैंकों के जरिए भुगतान किया जा चुका है। सहकारी बैंकों द्वारा बीमा राशि की गणना कर किसानों ऋण खातों और बचत खातों में यह राशि जमा की जा रही है। कल दो जून तक तीन लाख 39 हजार 591 किसानों के खातों में 337 करोड़ रूपए जमा किए जा चुके हैं। शेष राशि एक सप्ताह के भीतर जमा कर दी जाएगी। अपेक्स बैंक के अधिकारियों ने बैठक में मुख्यमंत्री को यह भी बताया कि राज्य सरकार द्वारा सूखा प्रभावित किसानों के लिए घोषित कृषि ऋण राहत योजना 2015 के तहत अब तक एक लाख लगभग एक लाख 82 हजार किसानों को 114 करोड़ 65 लाख रूपए की ऋण राहत दी जा चुकी है। यह ऋण राहत खरीफ वर्ष 2015 में ऐसे किसानों द्वारा सहकारी समितियों के माध्यम से लिए गए अल्पकालीन कृषि ऋण राशि में से 75 प्रतिशत राशि जमा करने पर 25 प्रतिशत की विशेष छूट के रूप में दी गई है। बैठक में कृषि एवं जैव प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा मुख्यमंत्री के समक्ष प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत तैयार राज्य सिंचाई योजना का प्रस्तुतिकरण दिया गया। इसके लिए वर्ष 2016-17 से 2020-21 तक पांच वर्ष की कार्य योजना बनाई गई है। इसमें 25 लाख 94 हजार हेक्टेयर के रकबे को शामिल करने का लक्ष्य है।
बैठक में कृषि विभाग के अपर मुख्य सचिव और कृषि उत्पादन आयुक्त श्री अजय सिंह, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री अमन कुमार सिंह, वन विभाग के प्रमुख सचिव श्री आर.पी. मंडल, जल संसाधन विभाग के सचिव श्री गणेश शंकर मिश्रा, वाणिज्य और उद्योग विभाग के सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सचिव डॉ. बी.एल. तिवारी, वित्त विभाग के सचिव श्री अमित अग्रवाल, पर्यटन, संस्कृति और जनसम्पर्क विभाग के सचिव श्री संतोष मिश्रा, आयुक्त आदिवासी विकास एवं संचालक जनसम्पर्क श्री राजेश सुकुमार टोप्पो, कृषि विभाग के संचालक श्री एम.एस. केरकेट्टा, जल संसाधन विभाग के प्रमुख अभियंता श्री एच.आर. कुटारे, उद्यानिकी विभाग के संचालक श्री नरेन्द्र पाण्डेय और अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।

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