हिंदी साहित्य

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शुभदा पाण्डेय की काव्यात्मा पुस्तक ‘महाकुंभ के माणिक मृगमन’ पर एक समीक्षात्मक दृष्टि

शुभदा जी की सद्यः प्रकाशित पुस्तक ‘महाकुंभ के माणिक मृगमन’ गंगा, महाकुंभ और आस्था के अद्भुत संगम की काव्यात्मक और संवेदनात्मक यात्रा है, जिसमें 28 कविताएं, 2 आलेख और छायाचित्रों के माध्यम से आध्यात्मिक अनुभवों को संजोया गया है।

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futuredछत्तीसगढ

गीत-संगीत और साहित्य से सजी एक अविस्मरणीय संध्या: डॉ. चित्तरंजन कर के 78वें जन्मदिवस पर हुआ भव्य सम्मान समारोह

रायपुर के वृंदावन हाल में वरिष्ठ साहित्यकार, गीतकार और भाषाविद् डॉ. चित्तरंजन कर के 78वें जन्मदिवस पर आयोजित “एक शाम डॉ. चित्तरंजन कर के नाम” कार्यक्रम में साहित्य जगत की विशिष्ट हस्तियों ने भाग लेकर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि और सम्मान अर्पित किया।

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futuredपुस्तक समीक्षा

शेष कथा: महाभारत के पात्रों के मनोविज्ञान और दर्शन का गहन विश्लेषण

‘शेष कथा’ कवयित्री जया गुप्ता द्वारा रचित एक प्रबंध काव्य है, जो महाभारत के पात्रों के भीतर चल रहे गहन अंतर्द्वंद्वों और दर्शन को नए दृष्टिकोण से प्रस्तुत करता है। युधिष्ठिर, भीष्म और द्रौपदी जैसे पात्रों को उन्होंने जिस संवेदनशीलता और प्रमाणिकता से उकेरा है, वह इस रचना को एक अलग ही ऊँचाई पर ले जाता है। दर्शन और मनोविज्ञान के स्तर पर यह कृति समकालीन साहित्य में एक उल्लेखनीय योगदान है।

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futuredसाहित्य

प्राचीन छत्तीसगढ़ के रचयिता प्यारेलाल गुप्त की साहित्य साधना

रविशकर वि”वविद्यालय रायपुर से सन् 1973 में प्रकाशित इस ग्रंथ में प्रागैतिहासिक काल से लेकर आधुनिक युग के पूर्व तक का श्रृंखलाबद्ध इतिहास है। इस ग्रंथ में न केवल प्राचीन छत्तीसगढ़ का इतिहास बल्कि सांस्कृतिक परम्पराओं, लोक कथाओं, पुरातत्व और साहित्य का उल्लेख है। इस ग्रंथ को ‘छत्तीसगढ़ का इनसाइक्लोपीडिया‘ माना जा सकता है। उन्होंने छत्तीसगढ़ की पदयात्रा करके इस ग्रंथ के लिए सामग्री जुटायी थी।

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futuredधर्म-अध्यात्म

रामचरितमानस का नैतिक और सामाजिक प्रभाव

तुलसीदास की रचनाओं का भारतीय जनमानस पर व्यापक प्रभाव पड़ा। रामचरितमानस का भारतीय जनमानस पर अत्यधिक गहरा और व्यापक प्रभाव पड़ा है। गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित यह महाकाव्य न केवल धार्मिक ग्रंथ के रूप में पूजनीय है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति, समाज और जीवन दर्शन का एक महत्वपूर्ण स्तंभ भी है।

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