हिंदी साहित्य

futuredसम्पादकीय

सीमाओं से परे बहती हिन्दी भाषा की धारा : हिन्दी दिवस विशेष

आलेख प्रवासी भारतीयों के अनुभवों और गिरमिटिया मजदूरों द्वारा दुनिया के विभिन्न हिस्सों में हिंदी के प्रसार को भी उजागर करता है। फिजी, मॉरीशस, सूरीनाम, त्रिनिदाद, अमेरिका, ब्रिटेन, दक्षिण अफ्रीका और खाड़ी देशों में हिंदी कैसे पहचान और जुड़ाव का माध्यम बनी, इसका उल्लेख इसमें विस्तार से किया गया है।

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futuredसाहित्य

प्रेमचंद साहित्य की मशाल:अगासदिया संस्था ने मनाई यादगार संध्या

भिलाई स्थित साहित्यिक संस्था ‘अगासदिया’ ने प्रेमचंद जयंती की पूर्व संध्या पर ‘स्मरण-प्रेमचंद’ कार्यक्रम आयोजित किया, जिसमें उनकी कहानियों के छत्तीसगढ़ी अनुवाद संग्रह पर चर्चा हुई और साहित्यिक प्रभावों पर विचार रखे गए।

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futuredसाहित्य

शुभदा पाण्डेय की काव्यात्मा पुस्तक ‘महाकुंभ के माणिक मृगमन’ पर एक समीक्षात्मक दृष्टि

शुभदा जी की सद्यः प्रकाशित पुस्तक ‘महाकुंभ के माणिक मृगमन’ गंगा, महाकुंभ और आस्था के अद्भुत संगम की काव्यात्मक और संवेदनात्मक यात्रा है, जिसमें 28 कविताएं, 2 आलेख और छायाचित्रों के माध्यम से आध्यात्मिक अनुभवों को संजोया गया है।

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futuredछत्तीसगढ

गीत-संगीत और साहित्य से सजी एक अविस्मरणीय संध्या: डॉ. चित्तरंजन कर के 78वें जन्मदिवस पर हुआ भव्य सम्मान समारोह

रायपुर के वृंदावन हाल में वरिष्ठ साहित्यकार, गीतकार और भाषाविद् डॉ. चित्तरंजन कर के 78वें जन्मदिवस पर आयोजित “एक शाम डॉ. चित्तरंजन कर के नाम” कार्यक्रम में साहित्य जगत की विशिष्ट हस्तियों ने भाग लेकर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि और सम्मान अर्पित किया।

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futuredपुस्तक समीक्षा

शेष कथा: महाभारत के पात्रों के मनोविज्ञान और दर्शन का गहन विश्लेषण

‘शेष कथा’ कवयित्री जया गुप्ता द्वारा रचित एक प्रबंध काव्य है, जो महाभारत के पात्रों के भीतर चल रहे गहन अंतर्द्वंद्वों और दर्शन को नए दृष्टिकोण से प्रस्तुत करता है। युधिष्ठिर, भीष्म और द्रौपदी जैसे पात्रों को उन्होंने जिस संवेदनशीलता और प्रमाणिकता से उकेरा है, वह इस रचना को एक अलग ही ऊँचाई पर ले जाता है। दर्शन और मनोविज्ञान के स्तर पर यह कृति समकालीन साहित्य में एक उल्लेखनीय योगदान है।

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futuredसाहित्य

प्राचीन छत्तीसगढ़ के रचयिता प्यारेलाल गुप्त की साहित्य साधना

रविशकर वि”वविद्यालय रायपुर से सन् 1973 में प्रकाशित इस ग्रंथ में प्रागैतिहासिक काल से लेकर आधुनिक युग के पूर्व तक का श्रृंखलाबद्ध इतिहास है। इस ग्रंथ में न केवल प्राचीन छत्तीसगढ़ का इतिहास बल्कि सांस्कृतिक परम्पराओं, लोक कथाओं, पुरातत्व और साहित्य का उल्लेख है। इस ग्रंथ को ‘छत्तीसगढ़ का इनसाइक्लोपीडिया‘ माना जा सकता है। उन्होंने छत्तीसगढ़ की पदयात्रा करके इस ग्रंथ के लिए सामग्री जुटायी थी।

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