सांस्कृतिक विरासत

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प्राचीन धरोहरों में संरक्षित दक्षिण कोसल की सांस्कृतिक विरासत

दक्षिण कोसल की ऐतिहासिक विरासत के माध्यम से छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान का अध्ययन, जिसमें सिरपुर, रतनपुर, भोरमदेव, शिलालेख, मंदिर स्थापत्य और प्राचीन नगरों की परंपरा का विस्तृत विवरण प्रस्तुत है।

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यूनेस्को ने दीपावली को मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर घोषित किया

यूनेस्को ने दीपावली को अपनी अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर सूची में शामिल किया। यह फैसला भारत की प्राचीन परंपरा को वैश्विक मंच पर चमकाने वाला कदम है, जो सामाजिक एकता और पारंपरिक कला को मजबूत करता है।

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ईसर–गौरा महोत्सव: ग्राम तुरमा में परंपरा और एकता का अद्भुत संगम

ग्राम तुरमा में देवउठनी एकादशी पर ध्रुव समाज द्वारा ईसर–गौरा महोत्सव धूमधाम से मनाया गया। परंपरागत विवाह, लोकनृत्य और सर्व समाज की सहभागिता ने सांस्कृतिक एकता का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया।

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साहित्य-सृजन से भी साकार हुआ सबका सपना : छत्तीसगढ़ राज्य रजत जयंती 2025 पर विशेष 

छत्तीसगढ़ की साहित्यिक यात्रा में अनेक रचनाकारों ने हिंदी और छत्तीसगढ़ी साहित्य को नई पहचान दी है। यह आलेख राज्य के साहित्यिक विकास, सृजनशीलता और सांस्कृतिक चेतना का समग्र चित्र प्रस्तुत करता है।

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वैदिक संस्कृति की आधारशिला सरस्वती नदी की शोध यात्रा

सरस्वती नदी की ऐतिहासिक, भूगर्भीय और पुरातात्त्विक खोजों पर आधारित यह आलेख वैदिक सभ्यता से जुड़ी सांस्कृतिक निरंतरता को आधुनिक वैज्ञानिक शोधों की दृष्टि से प्रमाणित करता है।

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ताजा खबरें

सांस्कृतिक विरासत पर संकट: मयमनसिंह में सत्यजीत रे परिवार के घर को तोड़ा गया

बांग्लादेश के मयमनसिंह में सत्यजीत रे के पैतृक घर को तोड़ने की घटना ने भारत और बांग्लादेश के बीच सांस्कृतिक और कूटनीतिक तनाव को उजागर कर दिया है। यह घर दो देशों की सांझी विरासत का प्रतीक था।

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