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मंदिर प्रवेश पर सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी, भेदभाव से समाज और धर्म दोनों को नुकसान

सुप्रीम कोर्ट ने मंदिरों में प्रवेश को लेकर कहा कि संप्रदाय के आधार पर भेदभाव समाज और धर्म दोनों के लिए हानिकारक है। अदालत ने समानता और धार्मिक परंपराओं के बीच संतुलन बनाए रखने पर जोर दिया।

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सबरीमला मामले की सुनवाई में केंद्र ने PIL पर उठाए सवाल, सुप्रीम कोर्ट बोला—पहले से ही बरत रहे हैं सावधानी

सबरीमला मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने जनहित याचिकाओं (PIL) को समाप्त करने की जरूरत बताई, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अदालतें पहले ही ऐसे मामलों में काफी सतर्कता बरत रही हैं। यह बहस महिलाओं के अधिकार और धार्मिक स्वतंत्रता के बीच संतुलन से जुड़े बड़े संवैधानिक सवालों को सामने लाती है।

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क्या राज्यपाल की मर्ज़ी पर चलेगी चुनी हुई सरकार? सुप्रीम कोर्ट का बड़ा सवाल

सुप्रीम कोर्ट में एक संवैधानिक पीठ ने बुधवार को यह सवाल उठाया कि क्या राज्य की चुनी हुई सरकार राज्यपाल की मनमर्जी पर निर्भर हो सकती है, अगर उन्हें विधेयक को अनिश्चितकाल तक रोकने की शक्ति दी जाए? मुख्य न्यायाधीश ने चेताया कि यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया और विधायी व्यवस्था के लिए प्रतिकूल हो सकता है। सुनवाई में राज्यपाल की भूमिका, उनके विवेकाधिकार और संविधान के अनुच्छेद 200 पर गहन चर्चा हुई।

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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सुप्रीम कोर्ट से मांगी राय, अनुच्छेद 143(1) के तहत भेजा अभूतपूर्व संदर्भ

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संविधान के अनुच्छेद 143(1) के तहत सुप्रीम कोर्ट से विधेयकों पर समयसीमा के संदर्भ में राय मांगी है। यह कदम सुप्रीम कोर्ट द्वारा ‘माना गया अनुमोदन’ की अवधारणा को लेकर उठाया गया है, जिसे राष्ट्रपति ने संविधान के विपरीत बताया है।

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