वैदिक वाङ्मय में मां और मातृशक्ति का स्वरूप और आध्यात्मिक महत्व
ऋग्वेद, अथर्ववेद, उपनिषद और पुराणों में वर्णित मातृशक्ति की अवधारणा, देवी स्वरूप, प्रकृति, ज्ञान और सृष्टि से जुड़े वैदिक दर्शन का विस्तृत विश्लेषण।
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Read Moreमानव सभ्यता के इतिहास में यदि किसी एक तत्व को जीवन का पर्याय कहा गया है, तो वह जल है। आज भी जब कोई प्राणी चेतना खोता है तो सबसे पहले उस पर जल का छिड़काव किया जाता है, इसलिए जल को अमृत कहा जाता है।
Read Moreहीं उनका संपर्क वे आर्य समाज से हुआ।वे आर्य समाज की वेदांत गोष्ठियों में भाग लेने लगे। उनकी व्याख्या और तर्क से समूचा वैदिक विद्वान समाज प्रभावित हुआ।उन्होंने आर्य समाज केलिये “सत्यार्थ प्रकाश”, “ऋग्वेदादि भाष्य भूमिका” व “योग तत्वादर्श” का मराठी में अनुवाद भी किया।
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